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Delhi NCR News: पूर्वी दिल्ली में फुटपाथ पर चलना मुश्किल, अतिक्रमण और बदहाल रखरखाव से सड़क पर उतर रहे पैदल यात्री
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सोनिया विहार से सीलमपुर, लक्ष्मी नगर, कड़कड़डूमा, पटपड़गंज और शाहदरा तक कई स्थानों पर फुटपाथों पर गड्ढे, गंदगी
रेहड़ी-पटरी, दुकानों का सामान और वाहनों की पार्किंग बन रही बाधा
विभागों में बंटी जिम्मेदारी से स्थायी समाधान का इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। अदालतों और दिल्ली के मास्टर प्लान में पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित और बाधारहित रास्ते की व्यवस्था पर जोर दिया गया है लेकिन पूर्वी दिल्ली के कई प्रमुख मार्गों पर लोगों को फुटपाथ की बजाय सड़क पर चलना पड़ रहा है। सोनिया विहार में फुटपाथ पर गहरा गड्ढा, सीलमपुर में गंदगी और अन्य इलाकों में अतिक्रमण के कारण बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांगजनों के सामने सबसे अधिक परेशानी है।
सोनिया विहार मेट्रो क्षेत्र के नीचे फुटपाथ पर गहरा गड्ढा पैदल यात्रियों के लिए जोखिम पैदा कर रहा है। वहीं सीलमपुर के व्यस्त मार्गों पर गंदगी और अवरोधों के बीच लोगों को निकलना पड़ता है। कड़कड़डूमा, लक्ष्मी नगर और पटपड़गंज जैसे व्यावसायिक क्षेत्रों में दुकानों के बाहर फैला सामान, रेहड़ी-पटरी और वाहनों की पार्किंग फुटपाथों की उपलब्ध चौड़ाई कम कर देती है।
शाहदरा रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाले मार्ग पर भी अतिक्रमण से यात्रियों को परेशानी होती है। स्टेशन आने-जाने वालों की बड़ी संख्या को देखते हुए यह समस्या यातायात और सड़क सुरक्षा, दोनों से जुड़ जाती है।
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दिल्ली के लागू मास्टर प्लान-2021 में 12 मीटर से अधिक चौड़ी सड़कों के दोनों ओर निरंतर और बाधारहित फुटपाथ की व्यवस्था का प्रावधान है। सामान्य रूप से इसकी न्यूनतम चौड़ाई 1.8 मीटर बताई गई है जबकि अधिक पैदल यातायात वाले क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार चौड़ाई बढ़ाने की बात कही गई थी लेकिन जमीनी स्तर पर इस तरह की चीजें नहीं दिख रही हैं। वादे केवल कागजों तक ही सिमट कर रह गए हैं।
अदालत और निगरानी समिति भी उठा चुकी हैं सवाल
दिल्ली उच्च न्यायालय ने सार्वजनिक रास्तों और फुटपाथों पर अवरोधों को लेकर पहले भी संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी तय करने की जरूरत पर जोर दिया है। एक आदेश में अदालत ने दिल्ली पुलिस और नगर निकायों को सार्वजनिक रास्ते से बाधाएं हटाने के लिए अपनी कानूनी शक्तियों का उपयोग करने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित मॉनिटरिंग कमेटी की जनवरी 2025 की रिपोर्ट भी फुटपाथों, सार्वजनिक पार्कों और सार्वजनिक स्थानों पर अवैध पार्किंग व अतिक्रमण के मुद्दे से संबंधित रही है।
कई एजेंसियों में बंटी जिम्मेदारी
दिल्ली पीडब्ल्यूडी अपनी सड़कों और उनसे जुड़े फुटपाथों के निर्माण व रखरखाव की जिम्मेदारी संभालता है जबकि अन्य क्षेत्रों में नगर निगम और संबंधित एजेंसियों की भूमिका होती है। अतिक्रमण हटाने और यातायात व्यवस्था में पुलिस की भी भूमिका है। अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी स्थायी समाधान की बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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रेहड़ी-पटरी, दुकानों का सामान और वाहनों की पार्किंग बन रही बाधा
विभागों में बंटी जिम्मेदारी से स्थायी समाधान का इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। अदालतों और दिल्ली के मास्टर प्लान में पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित और बाधारहित रास्ते की व्यवस्था पर जोर दिया गया है लेकिन पूर्वी दिल्ली के कई प्रमुख मार्गों पर लोगों को फुटपाथ की बजाय सड़क पर चलना पड़ रहा है। सोनिया विहार में फुटपाथ पर गहरा गड्ढा, सीलमपुर में गंदगी और अन्य इलाकों में अतिक्रमण के कारण बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांगजनों के सामने सबसे अधिक परेशानी है।
सोनिया विहार मेट्रो क्षेत्र के नीचे फुटपाथ पर गहरा गड्ढा पैदल यात्रियों के लिए जोखिम पैदा कर रहा है। वहीं सीलमपुर के व्यस्त मार्गों पर गंदगी और अवरोधों के बीच लोगों को निकलना पड़ता है। कड़कड़डूमा, लक्ष्मी नगर और पटपड़गंज जैसे व्यावसायिक क्षेत्रों में दुकानों के बाहर फैला सामान, रेहड़ी-पटरी और वाहनों की पार्किंग फुटपाथों की उपलब्ध चौड़ाई कम कर देती है।
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शाहदरा रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाले मार्ग पर भी अतिक्रमण से यात्रियों को परेशानी होती है। स्टेशन आने-जाने वालों की बड़ी संख्या को देखते हुए यह समस्या यातायात और सड़क सुरक्षा, दोनों से जुड़ जाती है।
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दिल्ली के लागू मास्टर प्लान-2021 में 12 मीटर से अधिक चौड़ी सड़कों के दोनों ओर निरंतर और बाधारहित फुटपाथ की व्यवस्था का प्रावधान है। सामान्य रूप से इसकी न्यूनतम चौड़ाई 1.8 मीटर बताई गई है जबकि अधिक पैदल यातायात वाले क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार चौड़ाई बढ़ाने की बात कही गई थी लेकिन जमीनी स्तर पर इस तरह की चीजें नहीं दिख रही हैं। वादे केवल कागजों तक ही सिमट कर रह गए हैं।
अदालत और निगरानी समिति भी उठा चुकी हैं सवाल
दिल्ली उच्च न्यायालय ने सार्वजनिक रास्तों और फुटपाथों पर अवरोधों को लेकर पहले भी संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी तय करने की जरूरत पर जोर दिया है। एक आदेश में अदालत ने दिल्ली पुलिस और नगर निकायों को सार्वजनिक रास्ते से बाधाएं हटाने के लिए अपनी कानूनी शक्तियों का उपयोग करने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित मॉनिटरिंग कमेटी की जनवरी 2025 की रिपोर्ट भी फुटपाथों, सार्वजनिक पार्कों और सार्वजनिक स्थानों पर अवैध पार्किंग व अतिक्रमण के मुद्दे से संबंधित रही है।
कई एजेंसियों में बंटी जिम्मेदारी
दिल्ली पीडब्ल्यूडी अपनी सड़कों और उनसे जुड़े फुटपाथों के निर्माण व रखरखाव की जिम्मेदारी संभालता है जबकि अन्य क्षेत्रों में नगर निगम और संबंधित एजेंसियों की भूमिका होती है। अतिक्रमण हटाने और यातायात व्यवस्था में पुलिस की भी भूमिका है। अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी स्थायी समाधान की बड़ी चुनौती बनी हुई है।