हांफता रेल ट्रैफिक, बेपटरी होती ट्रेन। न रेल मुसाफिर सुरक्षित है, न सफर पूरा होने का कोई समय है। जो योजनाएं बनीं भी, वो रेल मंत्रालय के दफ्तरों में धूल फांकती रहीं। मुसाफिरों का दबाव संभालने के लिये ट्रेन तो बढ़ा दी गयी। लेकिन न ट्रैक की लंबाई बढ़ी, न सुरक्षा के उपकरण लगे। अमर उजाला संवाददाता नवनीत शरण ने इन्हीं सवालों का जवाब रेलवे बोर्ड अध्यक्ष अश्वनी लोहानी से कोशिश की...
'रेलवे को पटरी पर लाने के लिये हर स्तर पर हो रहा काम', इन 5 सवालों का मिला जवाब
सवाल-रेल दुर्घटनाएं कैसे रूकेंगी?
जवाब- असल में, दशकों से रेलवे की बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया गया। जबकि मुसाफिरों व ट्रेनों की संख्या तेजी से बढ़ी। मसलन, आजादी के बाद रेलवे ट्रैक सिर्फ 35 फीसदी बढ़ा तो यात्री 1,500 व मालगाड़ी 1,700 फीसदी।
सवाल: फंड तो आड़े नहीं आया इसमें?
जवाब: नहीं, फंड की कोई कमी नहीं है। जरूरत मजबूत इच्छा शक्ति की है। और बदलाव काम की शैली में लाना है। फिलहाल इस दिशा में तेजी काम हो रहा है।
सवाल-हालिया दुर्घटनाओं में ट्रैक फ्रैक्चर बड़ी समस्या रही है। क्या दीर्घकालिक योजना है?
जवाब: इसे रोकने के लिये ट्रैक की नियमित सफाई जरूरी है। अब वाशेबल एप्रन से ट्रैक को लैस किया गया है। वहीं, करीब 5600 किमी पुराने ट्रैक को बदलने का टेंडर भी हो गया है। ट्रैक पर 10 हजार स्पॉट ऐसे हैं, जहां कुशन एफेक्ट (स्प्रिंग) नहीं है। इस पर भी काम चल रहा है।
सवाल: ट्रैक मैन व गैंग मैन की भी कमी है क्या?
जवाब: हां, लेकिन 50-60 हजार ट्रैक मैन की भर्ती जल्द होगी। कुली भी गैंग मैन बनने को राजी हैं। अधिकारियों के बंगले पर काम करने वाले कर्मी ड्यूटी पर बुला लिये गये हैं। इससे समस्या का समाधान मिलेगा। पहले की अपेक्षा ट्रैक की पेट्रोलिंग अब ज्यादा की जा रही है।