उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में जब उपद्रवी हमला कर रहे थे, तब गोली लगने से घायल एक मरीज अल हिंद अस्पताल में तड़प रहा था। उस वक्त रात के तकरीबन 8.15 का ही वक्त हुआ होगा। सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री आवास पर कविता कृष्णन, वृंदा करात और फरहान भी मौजूद थीं।
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अरविंद केजरीवाल
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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से जब तड़पते मरीज की मदद के लिए डॉक्टरों की टीम भेजने की अपील की गई, तो उन्होंने साधारण लहजे में कहा, उन्हें सरकारी अस्पताल जाना चाहिए। ये खुलासा किया है एडवोकेट पूनम कौशिक ने। हालांकि इन आरोपों पर सीएम से जवाब नहीं मिला है।
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अरविंद केजरीवाल
- फोटो : ANI
सोमवार को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में जन स्वास्थ्य अभियान की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूनम कौशिक ने बताया कि वे उस समय (25 फरवरी की रात) सीएम आवास पर मौजूद थीं। पहले वे उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से मिलीं, तब तक कोई सूचना नहीं थी, लेकिन जब वे लोग सीएम केजरीवाल के साथ थे, तभी अल हिंद अस्पताल से उनके पास फोन आया। उन्होंने तत्काल सीएम अरविंद केजरीवाल से मदद करने के लिए कहा, लेकिन सीएम ने उन्हें नसीहत दे डाली। उन्होंने कहा, सरकारी अस्पताल क्यों नहीं गए?
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अरविंद केजरीवाल
- फोटो : अमर उजाला
पूनम का कहना था कि दिल्ली के मुख्यमंत्री से इस तरह का जवाब मिलने की उम्मीद उन्होंने कभी नहीं की थी। उन्हें लगा कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सचिव सहित तमाम विभागों को वहां भेज सकते हैं लेकिन दोबारा बोलने पर उन्होंने कहा, अच्छा ठीक है हम भी बहुत चिंतित हैं, चलो देखते हैं। ये कहकर वे वापस चले गए। पूनम ने यहां तक कहा कि दिल्ली की हिंसा में केजरीवाल सरकार का रवैया सरोकार हीन सरकार जैसा देखने को मिला है।
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दिल्ली हिंसा में घायल शख्स
- फोटो : अमर उजाला
जब सीएम ने सुनवाई नहीं की तो वकीलों ने मिलकर हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस एस मुरलीधर और तलवंत सिंह से मदद मांगी, जिसके बाद उन्होंने आधी रात में ही पुलिस को रास्ता साफ कर बड़े अस्पताल में इलाज कराने के आदेश दिए। पूनम ने आखिर में यहां तक कहा कि इस पूरी चर्चा की गवाह वे स्वयं हैं। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि अरविंद केजरीवाल सरकार का ये रुख देखना पड़ेगा।