दिल्ली से सटे नोएडा में 11 साल पहले एक हत्याकांड ने पूरे देश और दुनिया को दहला कर रख दिया। जब यह मामला सामने आया था तो लोग इस बात से हैरान रह गए थे कि आखिर कैसे एक मां-बाप अपनी फूल सी बेटी की हत्या कर सकते हैं। हम बात कर रहे हैं देश की सबसे चर्चित मर्डर मिस्ट्री की जो आज तक सुलझाई नहीं जा सकी है। वो हत्याकांड था आरुषि-हेमराज हत्याकांड। 15 मई की रात आरुषि तलवार और हेमराज की हत्या की गई थी। आज उस खौफनाक हत्याकांड की 11वीं बरसी है, आइए जानते हैं क्या हुआ था उस रात और अब 11 साल बाद क्या है उस केस का स्टेटस...
खबर जो खो गईः 11 साल पहले आज ही के दिन हुआ था सबसे बड़ा हत्याकांड, पढ़ें पूरा घटनाक्रम
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पूरे देश को स्तब्ध कर देने वाला यह हत्याकांड 15 मई 2008 को अंजाम दिया गया था। हालांकि पूरी दुनिया के सामने ये घटना 16 मई 2008 को आई जब राजेश और नूपुर तलवार की बेटी आरुषि तलवार की खून से लथपथ डेड बॉडी उसके ही बेडरूम में मिली थी। उसके गले पर गहरा जख्म पाया गया था। उस दिन उनका नौकर हेमराज घर से गायब था, उस वक्त लोगों को ये शक था कि नौकर ने ही ये हत्या की और फरार हो गया।
हालांकि 17 मई की सुबह जब घर के नौकर हेमराज का भी खून से लथपथ शव आरूषि के घर की छत पर पड़ा हुआ मिला तो इस मामले में नया मोड़ आ गया। अब तक जिस नौकर की तलाश आरोपी के रूप में हो रही थी उसकी लाश मिलने से पूरी जांच की दिशा ही बदल गई।
इसके बाद 18 मई को पुलिस ने अपनी प्राथमिक जांच में कहा कि दोनो की हत्या सर्जरी के लिए प्रयुक्त उपकरण के जरिए की गई है। इससे आरुषि के माता-पिता संदेह के घेरे में आने लगे। 19 मई 2008 को राजेश तलवार के पूर्व नेपाली नौकर विष्णु शर्मा को संदिग्धों में शामिल किया गया।
दो दिन बाद 21 मई 2008 को दिल्ली पुलिस ने इस मामले में हत्या के एंगल से जांच शुरू की और पुलिस की जांच आरुषि के माता-पिता पर आकर टिक गई। 22 मई 2008 को आरुषि हत्याकांड की ऑनर किलिंग के एंगल से जांच शुरू होने पर परिवार संदेह के घेरे में आ गया। मामले में पुलिस ने आरुषि के दोस्त से पूछताछ की जिससे आरुषि ने हत्या के दिन से 45 दिन पहले तक कुल 688 बार फोन पर बात की थी।
इन सब बातों के सामने आने पर परिवार के साथ ही आरुषि के कैरेक्टर का मीडिया ट्रायल शुरू हो चुका था। एक ऐसा मामला जिसमें पुलिस की शुरुआती जांच में बहुत लापरवाही की गई उसमें लोग तमाम तरह के कयास लगाने लगे थे।
23 मई 2008 को आरुषि के पिता राजेश तलवार को आरुषि-हेमराज हत्याकांड के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद इस केस की गंभीरता के चलते 1 जून 2008 को सीबीआई को मामले की जांच सौंपी गई। यहीं से शुरू हुई इस केस की सीबीआई जांच जिसका आज तक नतीजा न निकल सका है।
13 जून 2008 को सीबीआई ने राजेश तलवार से पूछताछ के बाद नौकर कृष्णा को भी गिरफ्तार कर लिया। धीरे-धीरे इस केस की जांच आगे बढ़ रही थी। 20 जून 2008 को दिल्ली के सीएफएसएल में राजेश तलवार का लाई डिटेक्टर टेस्ट किया गया। अब तक इस केस की जांच की जद में आरुषि की मां भी आ चुकी थीं। 25 जून 2008 को आरुषि की मां नूपुर तलवार का दूसरा लाई डिटेक्टर टेस्ट किया गया। नुपुर का पहला टेस्ट किसी निर्णय तक नहीं पहुंचा था।
इन सब के बीच राजेश तलवार की जमानत की कोशिश जारी थी लेकिन 26 जून 2008 को गाजियाबाद की अदालत ने राजेश तलवार को जमानत देने से मना कर दिया। कानून के तहत आरोपियों का नार्को टेस्ट किसी सबूत के रूप में नहीं माना जा सकता। 3 जुलाई 2008 को आरोपियों के नॉर्को टेस्ट को चैलेंज करने वाली जनहित याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। 12 जुलाई 2008 को राजेश तलवार को गाजियाबाद की डासना जेल ने जमानत दे दी।