दुनिया के सबसे बुजुर्ग और वर्ल्ड रिकार्ड बनाने वाले 105 साल के इस मैराथन रनर और एथलीट ने करोड़ों के ऑफर ठुकरा दिए। उन्होंने ऐसा करने का कारण भी बताया।
एथलीट फौजा सिंह पंजाब के जालंधर में एक कार्यक्रम में शिरकत करते आए थे। यहां उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुझे किसी की गुलामी पसंद नहीं है। 150 पाउंड (करीब 12 हजार तीन सौ रुपए) पेंशन मिलती है। वही मेरे लिए बहुत बड़ी है। पिछले दिनों एक चाकलेट कंपनी के लोग भी आए थे। मैंने ना कर दी। उन्होंने मुझे एक चैरिटी कार्यक्रम में बुलाया और 25 लाख दिए। मैंने वो पैसा आगे अपनी चैरिटी वाली संस्था को ही दे दिया।
फौजा सिंह ने बताया कि उन्होंने साइकिल कंपनी का करार भी ठुकरा दिया। एक ट्रैक्टर कंपनी का कांसेप्ट था कि जितने बूढ़े फौजा सिंह है, उतना ही लंबा चलने वाला हमारा ट्रैक्टर होगा। कंपनी वाले उनके पास गए लेकिन उन्होंने इसके लिए भी इनकार कर दिया। बता दें कि फौजा सिंह पंजाब के जालंधर के रहने वाले हैं। उनके तीन बेटे हैं। 1983 में उनक पत्नी ज्ञान कौर का निधन हुआ। एक बेटे कुलदीप की भी 1992 में मौत हो गई।
फौजा सिंह के सबसे छोटे बेटे का नाम हरविंदर सिंह हैं। एक बेआ सुखजिंदर विदेश में रहता है। कुलदीप की मौत के बाद वह उन्हें अपने साथ ले गया। वहीं पर लंदन मैराथन हुई, जिसमें वे हिस्सा लेने के लिए गए। बस यही से उनकी लोकप्रियता का दौर शुरू हुआ। फौजा सिंह बताते हैं कि वह हर साल जनवरी में गांव आते हैं। वह रोजाना भागते हैं। इसके साथ ही वह अपने खान-पान पर भी पूरी तरह से ध्यान देते हैं। वह जंक फूड बिल्कुल नहीं खाते हैं।
फौजा सिंह ने कहा कि नशे जीवन बर्बाद कर देते हैं, लेकिन पंजाब के नौजवान नशों की दलदल में बुरी तरह से फंस रहे हैं। नौजवानों को नशों से दूर रहना चाहिए, तभी जाकर वह अपने जीवन में सफल हो सके। फौजा सिंह ने इस मौके पर हाफ मैराथन की थीम की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि अगर व्यक्ति स्वस्थ है, तभी वह एक अच्छा जीवन जी सकता है। इसलिए स्वस्थ रहने के लिए रोजाना सैर व व्यायाम करें।