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कम या ज्यादा नींद खतरनाक है, ये जानलेवा बीमारी हो सकती है, सावधान रहें
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 31 Oct 2017 09:09 AM IST
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ब्रेन स्ट्रोक
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बहुत कम सोना या बहुत ज्यादा सोना भी खतरनाक होता है। इससे आपको एक गंभीर बीमारी हो सकती है, जो एक झटके में जान ले लेगी।
आमतौर पर माना जाता है कि ब्रेन स्ट्रोक 45 वर्ष की उम्र के बाद आता है, मगर अब पीजीआई की ओपीडी में कम उम्र के लोग भी ब्रेन स्ट्रोक के शिकार आ रहे हैं। अब 20 वर्ष की उम्र में नौजवानों को ब्रेन अटैक आ रहा है। पीजीआई के विशेषज्ञों को मानना है कि साल 2025 में भारत व विकासशील देशों में सबसे ज्यादा मौत का कारण ब्रेन अटैक होगा।
पीजीआई में एक साल में कुल 600 मरीज ब्रेन अटैक से पीड़ित आते हैं। इनमें से 25-30 प्रतिशत यंग मरीज होते हैं। इनकी उम्र 20 से 35 साल है। हाल में ही पीजीआई में 20 साल की उम्र का एक नौजवान ब्रेन स्ट्रोक से पीड़ित मरीज आया था। ब्रेन स्ट्रोक आने पर मरीज को जल्द से जल्द पीजीआई पहुंचाएं। जल्दी इलाज मिलने से विकलांगता को रोका जा सकता है।
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आमतौर पर माना जाता है कि ब्रेन स्ट्रोक 45 वर्ष की उम्र के बाद आता है, मगर अब पीजीआई की ओपीडी में कम उम्र के लोग भी ब्रेन स्ट्रोक के शिकार आ रहे हैं। अब 20 वर्ष की उम्र में नौजवानों को ब्रेन अटैक आ रहा है। पीजीआई के विशेषज्ञों को मानना है कि साल 2025 में भारत व विकासशील देशों में सबसे ज्यादा मौत का कारण ब्रेन अटैक होगा।
पीजीआई में एक साल में कुल 600 मरीज ब्रेन अटैक से पीड़ित आते हैं। इनमें से 25-30 प्रतिशत यंग मरीज होते हैं। इनकी उम्र 20 से 35 साल है। हाल में ही पीजीआई में 20 साल की उम्र का एक नौजवान ब्रेन स्ट्रोक से पीड़ित मरीज आया था। ब्रेन स्ट्रोक आने पर मरीज को जल्द से जल्द पीजीआई पहुंचाएं। जल्दी इलाज मिलने से विकलांगता को रोका जा सकता है।
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विटामिन डी व बी-12 की कमी से भी ब्रेन स्ट्रोक
facts about brain
- फोटो : oddee
अब तक ब्रेन स्ट्रोक की वजह हाइपरटेंशन, कोलेस्ट्राल बढ़ने, स्मोकिंग व शराब को माना जाता रहा है, लेकिन अब इसके कुछ नए रिस्क फैक्टर सामने आ गए हैं। मगर नई
रिसर्च के मुताबिक, विटामिन डी और बी-12 की कमी से भी ब्रेन स्ट्रोक आ सकता है। विटामिन की कमी से मेटाबोलिक सिंड्रोम प्रभावित होता है और उसे स्ट्रोक आने की प्रबल संभावना रहती है।
ऐसे कई केस सामने आ चुके हैं, जिनमें कोई और कारण नहीं बल्कि विटामिन की कमी देखी गई। आजकल लोग एसी में रहते हैं। धूप से बचते रहते हैं और उनमें विटामिन डी की कमी हो जाती है। यदि लोग ऐसी स्थिति में रह रहे हैं तो उन्हें महीने में एक बार जरूर धूप के सामने बैठना चाहिए या फिर वे विटामिन डी की दवाएं लें, क्योंकि विटामिन डी का कोई स्रोत नहीं है।
बेहतर जीवन शैली कई बीमारियों का कारण बन गई है। तनाव और व्यायाम की कमी से न्यूरोलाजिकल समस्याएं सामने आ रही हैं। इन बिमारियों से बचने के लिए रोज व्यायाम करें और पौष्टिक भोजन खाएं। ब्रेन स्ट्रोक लोगों को विकलांग बना देता है।
- डा. जगजीत एस चोपड़ा, पूर्व एचओडी पीजीआई
रिसर्च के मुताबिक, विटामिन डी और बी-12 की कमी से भी ब्रेन स्ट्रोक आ सकता है। विटामिन की कमी से मेटाबोलिक सिंड्रोम प्रभावित होता है और उसे स्ट्रोक आने की प्रबल संभावना रहती है।
ऐसे कई केस सामने आ चुके हैं, जिनमें कोई और कारण नहीं बल्कि विटामिन की कमी देखी गई। आजकल लोग एसी में रहते हैं। धूप से बचते रहते हैं और उनमें विटामिन डी की कमी हो जाती है। यदि लोग ऐसी स्थिति में रह रहे हैं तो उन्हें महीने में एक बार जरूर धूप के सामने बैठना चाहिए या फिर वे विटामिन डी की दवाएं लें, क्योंकि विटामिन डी का कोई स्रोत नहीं है।
बेहतर जीवन शैली कई बीमारियों का कारण बन गई है। तनाव और व्यायाम की कमी से न्यूरोलाजिकल समस्याएं सामने आ रही हैं। इन बिमारियों से बचने के लिए रोज व्यायाम करें और पौष्टिक भोजन खाएं। ब्रेन स्ट्रोक लोगों को विकलांग बना देता है।
- डा. जगजीत एस चोपड़ा, पूर्व एचओडी पीजीआई
एफएएसटी (फास्ट) से पहचाने ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण
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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण को पहचानने के लिए एफएएसटी (फास्ट) का नारा दिया है। इसके सभी शब्दों का अलग-अलग अर्थ है और अपना महत्व भी। डा. प्रभाकर का कहना है कि यदि मरीज साढ़े चार घंटे के भीतर न्यूरोलाजिस्ट के पास पहुंच जाए तो उससे होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है।
एफ-फेस (फेसियल वीकनेस) : रोगी को हंसने के लिए कहें। उसका चेहरा, होठ और आँख एक तरफ लटक जाए तो यह मस्तिष्क के दौरे का लक्षण है।
ए-आर्म्स (आर्म्स वीकनेस) रोगी को हाथ उठाने और सामने फ़ैलाने के लिए कहे। अगर रोगी का एक हाथ उठ न पाए और उठते ही नीचे झुक जाए। यह भी मस्तिष्क के दौरे का लक्षण है।
एस-स्पीच (स्पीच डिफिकल्टी) रोगी से कुछ सवाल पूछे। अगर वो ठीक से बोल न पाए और उसकी आवाज लड़खड़ाए, छोटे वाक्य भी मुश्किल से बोले तो यह भी एक लक्षण है।
टी-टाइम (टाइम टू एक्ट) : ऐसी स्तिथि में रोगी को तुरंत डॉक्टर के पास अस्पताल में पहुचाना चाहिए। पहले साढ़े चार घंटे के अंदर रोगी यदि डाक्टर के पास पहुंच जाए तो काफी बड़ी क्षति को बचाया जा सकता है।
एफ-फेस (फेसियल वीकनेस) : रोगी को हंसने के लिए कहें। उसका चेहरा, होठ और आँख एक तरफ लटक जाए तो यह मस्तिष्क के दौरे का लक्षण है।
ए-आर्म्स (आर्म्स वीकनेस) रोगी को हाथ उठाने और सामने फ़ैलाने के लिए कहे। अगर रोगी का एक हाथ उठ न पाए और उठते ही नीचे झुक जाए। यह भी मस्तिष्क के दौरे का लक्षण है।
एस-स्पीच (स्पीच डिफिकल्टी) रोगी से कुछ सवाल पूछे। अगर वो ठीक से बोल न पाए और उसकी आवाज लड़खड़ाए, छोटे वाक्य भी मुश्किल से बोले तो यह भी एक लक्षण है।
टी-टाइम (टाइम टू एक्ट) : ऐसी स्तिथि में रोगी को तुरंत डॉक्टर के पास अस्पताल में पहुचाना चाहिए। पहले साढ़े चार घंटे के अंदर रोगी यदि डाक्टर के पास पहुंच जाए तो काफी बड़ी क्षति को बचाया जा सकता है।
ब्रेन अटैक के लक्षण
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चेहरे, बाजू व टांग में अचानक कमजोरी। अचानक बोलने व समझने में कठिनाई। अचानक एक या दोनों आंखों से दिखाई न देना। अचानक चलने-फिरने में कठिनाई, शरीर का संतुलन बनाए रखने में कठिनाई। बिना किसी कारण अचानक तेज सिर दर्द।
इनका रखें ध्यान, नहीं आएगा स्ट्रोक
ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करे। कोलेस्ट्राल को कंट्रोल करें। मोटापा, शुगर को काबू करें। स्मोक और शराब को छोड़ दें। जंक फूड खाना छोड़ें।
इन्हें ब्रेन स्ट्रोक की संभावना ज्यादा
उम्रदराज, ब्रेन स्ट्रोक की फैमिली हिस्ट्री, स्मोकिंग करने वालों को, दिल के मरीज, शुगर के मरीज, कॉलेस्ट्राल के मरीज, ब्लड प्रेशर के मरीज, बहुत ज्यादा या बहुत कम सोने वालों को।
इनका रखें ध्यान, नहीं आएगा स्ट्रोक
ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करे। कोलेस्ट्राल को कंट्रोल करें। मोटापा, शुगर को काबू करें। स्मोक और शराब को छोड़ दें। जंक फूड खाना छोड़ें।
इन्हें ब्रेन स्ट्रोक की संभावना ज्यादा
उम्रदराज, ब्रेन स्ट्रोक की फैमिली हिस्ट्री, स्मोकिंग करने वालों को, दिल के मरीज, शुगर के मरीज, कॉलेस्ट्राल के मरीज, ब्लड प्रेशर के मरीज, बहुत ज्यादा या बहुत कम सोने वालों को।
ब्रेन अटैक और ब्रेन हेमरिज में अंतर
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दोनों में काफी अंतर है। जब दिमाग की नस खून की सप्लाई कम करे तो उसे छोटा ब्रेन अटैक कहते हैं। जब नस ब्लाक हो जाए तो उसे एस्केमिक यानी ब्रेन अटैक कहते हैं और जब दिमाग की नस फट जाए तो उसे ब्रेन हेमरिज कहते हैं। यह 20 में से 3 लोगों में होता है। ब्रेन हेमरिज उन लोगों में ज्यादा होने की संभावनाए होती जिनका बीपी अनकंट्रोल होता है। खास तौर पर सुबह चार बजे। इस दौरान लोगों का सबसे ज्यादा बीपी हाई होता है।
क्या हैं ब्रेन अटैक
जब दिमाग की एक नस में अचानक खून पहुंचना बंद हो जाए तो उसे ब्रेन अटैक कहते हैं। दिमाग की कोशिकाओं के रक्त में से आक्सीजन की लगातार आवश्यकता होती है, जैसे ही रक्त पहुंचना बंद हो जाता है तो मस्तिष्क के प्रभावित हिस्से की कोशिकाएं नष्ट हो जाती है।
छोटा ब्रेन अटैक
छोटा ब्रेन अटैक के लक्षण भी ब्रेन अटैक के सामान ही होते हैं, लेकिन ये 24 घंटों से कम के लिए होते हैं। यह मस्तिष्क के किसी भाग में रक्त की कमी के कारण होते हैं। इसे ट्रान्सिएट एस्केमिक अटैक भी कहते हैं। ब्रेन अटैक की अपेक्षा इसके लक्षण जल्द ही दूर हो जाते हैं। फिर भी छोटे ब्रेन अटैक की अवस्था में जल्द ही डाक्टर को दिखाना चाहिए, क्योंकि इसमें ब्रेन अटैक के खतरे बढ़ जाते हैं। इसमें मरीज को बोलने में थोड़ी दिक्कत होगी, कमजोरी लगेगी और फिर बोलने की क्षमता पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।
क्या हैं ब्रेन अटैक
जब दिमाग की एक नस में अचानक खून पहुंचना बंद हो जाए तो उसे ब्रेन अटैक कहते हैं। दिमाग की कोशिकाओं के रक्त में से आक्सीजन की लगातार आवश्यकता होती है, जैसे ही रक्त पहुंचना बंद हो जाता है तो मस्तिष्क के प्रभावित हिस्से की कोशिकाएं नष्ट हो जाती है।
छोटा ब्रेन अटैक
छोटा ब्रेन अटैक के लक्षण भी ब्रेन अटैक के सामान ही होते हैं, लेकिन ये 24 घंटों से कम के लिए होते हैं। यह मस्तिष्क के किसी भाग में रक्त की कमी के कारण होते हैं। इसे ट्रान्सिएट एस्केमिक अटैक भी कहते हैं। ब्रेन अटैक की अपेक्षा इसके लक्षण जल्द ही दूर हो जाते हैं। फिर भी छोटे ब्रेन अटैक की अवस्था में जल्द ही डाक्टर को दिखाना चाहिए, क्योंकि इसमें ब्रेन अटैक के खतरे बढ़ जाते हैं। इसमें मरीज को बोलने में थोड़ी दिक्कत होगी, कमजोरी लगेगी और फिर बोलने की क्षमता पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।