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Chandigarh News: ऑनलाइन सुविधा बनी ऑफलाइन सजा
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चंडीगढ़। अस्पताल की ऑनलाइन सुविधाएं मरीजों का समय और चक्कर बचाने के लिए शुरू की जाती हैं लेकिन जीएमसीएच-32 में इन दिनों मरीजों को इसका उलटा सामना करना पड़ रहा है। यहां ऑनलाइन टेस्ट रिपोर्ट नहीं निकल रही और एडवांस ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेने में भी परेशानी आ रही है। ऐसे में मरीजों को रिपोर्ट लेने से लेकर डॉक्टर से मिलने का समय लेने तक अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। मरीजों के अनुसार करीब तीन महीने से ऑनलाइन सेवाओं में दिक्कत बनी हुई है।
8 की जगह 11 डिजिट का सीआर नंबर, रिपोर्ट ढूंढना मुश्किल
मरीजों का कहना है कि पहले आठ डिजिट के सीआर नंबर से जीएमसीएच-32 की वेबसाइट पर टेस्ट रिपोर्ट आसानी से मिल जाती थी। अब सीआर नंबर 11 डिजिट का हो गया है और रिपोर्ट तलाशने के लिए नेशनल सर्च का सहारा लेना पड़ रहा है। पहले घर बैठे रिपोर्ट डाउनलोड कर मरीज तय कर लेते थे कि डॉक्टर को कब दिखाना है। अब रिपोर्ट के लिए ही दोबारा अस्पताल आना पड़ रहा है।
लुधियाना के फॉलोअप मरीज बिजेंद्र सिंह ने बताया कि पहले सीआर नंबर डालकर वेबसाइट से रिपोर्ट आसानी से मिल जाती थी लेकिन अब रिपोर्ट ढूंढने में परेशानी होती है। वहीं सेक्टर-22 की कविता शर्मा ने कहा कि ऑनलाइन अपॉइंटमेंट और रिपोर्ट की सुविधा से काफी समय बचता था। अब दोनों सेवाओं में दिक्कत के कारण परेशानी बढ़ गई है।
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नेक्स्ट जेन सुविधा के लिए वेबसाइट अपडेट
अस्पताल की वेबसाइट को नेक्स्ट जेनरेशन सुविधा के लिए अपडेट किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पंजीकरण, अपॉइंटमेंट, जांच रिपोर्ट और अस्पताल से जुड़ी अन्य जानकारियां एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना है। हालांकि, अपडेट की प्रक्रिया में फिलहाल एडवांस अपॉइंटमेंट और ऑनलाइन रिपोर्ट की सुविधा प्रभावित हो रही है।
एनआईसी पोर्टल माइग्रेशन के बाद तकनीकी खामी
एबीएचए सिस्टम से जोड़ने के लिए अस्पताल को एनआईसी के पुराने आंतरिक अस्पताल प्रबंधन पोर्टल से केंद्रीकृत एनआईसी प्लेटफॉर्म पर माइग्रेट किया गया। इसके बाद ऑनलाइन रिपोर्टिंग में तकनीकी दिक्कतें सामने आईं। कर्मचारियों को भी रिपोर्ट अपलोड करने में परेशानी हो रही है। जीएमसीएच के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विशाल गोगलानी ने बताया कि दोनों प्लेटफॉर्म के बीच माइग्रेशन के दौरान तकनीकी खामी आई है। दिल्ली स्थित एनआईसी की तकनीकी टीम के साथ मिलकर इसे दूर किया जा रहा है। व्यवस्था पूरी तरह स्थिर होने में करीब एक महीने का समय लग सकता है।
कोट...
दोनों प्लेटफॉर्म के बीच माइग्रेशन के दौरान तकनीकी खामी आई है। अस्पताल दिल्ली स्थित एनआईसी की तकनीकी टीम के साथ मिलकर इसे दूर करने में जुटा है। व्यवस्था को पूरी तरह स्थिर होने में करीब एक महीने का समय लग सकता है। - डॉ. विशाल गोगलानी, चिकित्सा अधीक्षक जीएमसीएच-32
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8 की जगह 11 डिजिट का सीआर नंबर, रिपोर्ट ढूंढना मुश्किल
मरीजों का कहना है कि पहले आठ डिजिट के सीआर नंबर से जीएमसीएच-32 की वेबसाइट पर टेस्ट रिपोर्ट आसानी से मिल जाती थी। अब सीआर नंबर 11 डिजिट का हो गया है और रिपोर्ट तलाशने के लिए नेशनल सर्च का सहारा लेना पड़ रहा है। पहले घर बैठे रिपोर्ट डाउनलोड कर मरीज तय कर लेते थे कि डॉक्टर को कब दिखाना है। अब रिपोर्ट के लिए ही दोबारा अस्पताल आना पड़ रहा है।
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लुधियाना के फॉलोअप मरीज बिजेंद्र सिंह ने बताया कि पहले सीआर नंबर डालकर वेबसाइट से रिपोर्ट आसानी से मिल जाती थी लेकिन अब रिपोर्ट ढूंढने में परेशानी होती है। वहीं सेक्टर-22 की कविता शर्मा ने कहा कि ऑनलाइन अपॉइंटमेंट और रिपोर्ट की सुविधा से काफी समय बचता था। अब दोनों सेवाओं में दिक्कत के कारण परेशानी बढ़ गई है।
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नेक्स्ट जेन सुविधा के लिए वेबसाइट अपडेट
अस्पताल की वेबसाइट को नेक्स्ट जेनरेशन सुविधा के लिए अपडेट किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पंजीकरण, अपॉइंटमेंट, जांच रिपोर्ट और अस्पताल से जुड़ी अन्य जानकारियां एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना है। हालांकि, अपडेट की प्रक्रिया में फिलहाल एडवांस अपॉइंटमेंट और ऑनलाइन रिपोर्ट की सुविधा प्रभावित हो रही है।
एनआईसी पोर्टल माइग्रेशन के बाद तकनीकी खामी
एबीएचए सिस्टम से जोड़ने के लिए अस्पताल को एनआईसी के पुराने आंतरिक अस्पताल प्रबंधन पोर्टल से केंद्रीकृत एनआईसी प्लेटफॉर्म पर माइग्रेट किया गया। इसके बाद ऑनलाइन रिपोर्टिंग में तकनीकी दिक्कतें सामने आईं। कर्मचारियों को भी रिपोर्ट अपलोड करने में परेशानी हो रही है। जीएमसीएच के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विशाल गोगलानी ने बताया कि दोनों प्लेटफॉर्म के बीच माइग्रेशन के दौरान तकनीकी खामी आई है। दिल्ली स्थित एनआईसी की तकनीकी टीम के साथ मिलकर इसे दूर किया जा रहा है। व्यवस्था पूरी तरह स्थिर होने में करीब एक महीने का समय लग सकता है।
कोट...
दोनों प्लेटफॉर्म के बीच माइग्रेशन के दौरान तकनीकी खामी आई है। अस्पताल दिल्ली स्थित एनआईसी की तकनीकी टीम के साथ मिलकर इसे दूर करने में जुटा है। व्यवस्था को पूरी तरह स्थिर होने में करीब एक महीने का समय लग सकता है। - डॉ. विशाल गोगलानी, चिकित्सा अधीक्षक जीएमसीएच-32