नए कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की घेराबंदी करने गए किसानों के खेतों में गेहूं की बुआई में देरी हो रही है। पंजाब के अबोहर के कुछ किसानों ने अपने खर्च पर आंदोलन करने गए किसानों के खेतों में गेहूं की बुआई शुरू की है। ये किसान अब तक करीब 80 एकड़ में गेहूं की बुआई कर चुके हैं।
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- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अबोहर के गांव चन्नखेड़ा के किसान अनमोल संधू और मनप्रीत सिंह ने बताया कि अबोहर के हजारों किसान दिल्ली सीमा पर आंदोलन कर रहे हैं। इनमें से कुछ किसान ऐसे हैं, जिनके घर पर फसल की बुआई करने वाला कोई नहीं है। गेहूं बुआई का समय 15 दिसंबर के बाद लेट हो रहा है।
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अनमोल संधू, मनप्रीत सिंह व अन्य।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अनमोल संधू और मनप्रीत सिंह ने ऐसे किसानों के खेतों में अपने कृषि यंत्रों से बुआई शुरू की और अब तक करीब 80 एकड़ गेहूं की बुआई कर चुके हैं। वे खेत मालिक किसान के घर से खाद और बीज लेते हैं, जबकि ट्रैक्टर का तेल, सुपरसीडर और मजदूरों का खर्च खुद वहन कर रहे हैं।
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सिंघु बॉर्डर पर डटे किसान।
- फोटो : अमर उजाला
अनमोल संधू ने बताया कि अपने क्षेत्र के गांव चननखेड़ा, कुंडल, भंगाला, पक्की और कई अन्य गांवों में गेहूं की बुआई करने के साथ ही वे जालंधर, डेराबस्सी और सहनेवाला में भी किसानों के खेतों में बुआई करवा चुके हैं। उन्होंने किराये पर सुपरसीडर चलाने वाले वहां के लोगों से संपर्क किया और उनके खाते में खर्च भेजा और किसानों के खेतों में बुआई करवाई।
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सिंघु बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन।
- फोटो : अमर उजाला
इसमें जालंधर के सुपरसीडर चलाने वालों ने भी डीजल में आधा सहयोग दिया है। दोनों किसानों का कहना है कि वे तब तक इन किसानों की फसलों की देखभाल करेंगे, जब तक हमारे किसान दिल्ली से कृषि कानूनों को रद्द करवाकर नहीं लौटते। दोनों किसानों की इस सेवा भावना के लिए अन्य किसान परिवार इनका धन्यवाद कर रहे हैं।