आपको जानकर हैरानी होगी, लेकिन ये सच है कि देश में एक ऐसे गांव का पता चला है, जहां के पीने के पानी में जानवरों के खून और मांस का रिसाव होता है।
दरअसल, हरियाणा के मुस्लिम बहुल जिले मेवात पर सरकार की नजर-ए-इनायत नहीं हो रही। जिला मुख्यालय नूंह के साथ सटे टपकन गांव के बूचड़खाने से क्षेत्र के जल स्रोत दूषित हो रहे हैं। तालाबों में पशुओं के खून और सड़े-गले मांस का रिसाव हो रहा है। यही नहीं, बारिश होने पर पशुओं का खून व गंदगी नूंह डिस्ट्रीब्यूटरी और कोटला झील को भी प्रदूषित करता है।
नूंह डिस्ट्रीब्यूटरी का पानी सिंचाई करने के साथ ही पशुओं को पिलाने व नहलाने के काम लाया जाता है। करीब चार साल से संचालित बूचड़खाने की गंदगी पानी में मिलने के बाद आसपास के गांवों टपकन, नूंह, कोटला, नलहड़, पल्ला, नंगली इत्यादि के ग्रामीणों ने पानी का इस्तेमाल करना छोड़ दिया है। सरकार ने कोटला झील क्षेत्र को बाढ़ से बचाने और पेयजल आपूर्ति के लिए बनाई है।
लेकिन करोड़ों खर्च करने के बावजूद इसका सदुपयोग नहीं हो पा रहा। इसका पानी पीने से लोग कतरा रहे हैं और उन्हें पशुओं के साथ ही खुद में संक्रमण का खतरा सता रहा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन के समक्ष इस मसले को कई बार उठाया, लेकिन बूचड़खाना संचालकों के प्रभाव के कारण कार्रवाई नहीं हो पाई। नूंह के विधायक जाकिर हुसैन भी इस मसले को सरकार के समक्ष उठा चुके हैं, इसके बावजूद स्थिति जस की तस है।
दूषित पानी से महामारी का खतरा
नूंह से इनेलो विधायक जाकिर हुसैन ने कहा कि बूचड़खाने से पशुओं की हड्डियां खुले में फेंक दी जाती हैं। जिससे खून और गंदगी साथ लगते तालाबों में मिलती है। जिससे नूंह डिस्ट्रीब्यूटरी का पानी दूषित हो रहा है। उन्होंने सरकार व जिला प्रशासन के समक्ष मसले को उठाया, मगर उचित कार्रवाई नहीं हुई।