12वीं में फेल हो गए, लेकिन खेल के प्रति जज्बा कम नहीं हुआ। इतना खेले कि तीन बार ओलंपिक गोल्ड मेडल जीते और लिविंग लेजेंड कहलाए, पढ़ें प्रोफाइल।
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3 बार ओलंपिक गोल्ड मेडल विजेता
हम बात कर रहे हैं, हॉकी में तीन बार के ओलंपिक गोल्ड मेडल विजेता और गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर, वर्ल्ड के 16 आइकानिक प्लेयर में शुमार पद्मश्री बलबीर सिंह सीनियर की। एमडीयू रोहतक के वार्षिक खेल सम्मान समारोह में पहुंचे बलबीर सिंह ने मीडिया के साथ अपने अनुभव सांझा किए।
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3 बार ओलंपिक गोल्ड मेडल विजेता
बलबीर सिंह ने बताया कि पांच साल की उम्र से हॉकी का जनून सिर पर चढ़ने लगा था। हॉकी की तरफ रुझान इतना बढ़ा कि 12वीं में फेल हुआ तो माता-पिता ने इस खेल को जिम्मेदार ठहरा दिया। पढ़ने के लिए जालंधर से लाहौर के नेशनल कॉलेज में भेज दिया। पर हॉकी के प्रति लगाव कम होने की बजाय बढ़ता चला गया और फिर एक के बाद एक रिकॉर्ड कायम कर देश के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बन गए।
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3 बार ओलंपिक गोल्ड मेडल विजेता
बता दें कि इसी महान खिलाड़ी ने आजादी के बाद पहली बार लंदन ओलंपिक में भारत की तरफ से इंग्लैंड को करारी शिकस्त दी थी। सन् 1924 को पंजाब के हरिपुर खालसा में उनका जन्म हुआ। 12वीं में फेल होने के बाद स्वतंत्रता सेनानी रहे पिता दिलीप सिंह ने उन्हें लाहौर के सिख नेशनल कॉलेज में भेज दिया। वहां पर उन्होंने कोच हरबैल सिंह के अंडर में रहकर प्रैक्टिस की।
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3 बार ओलंपिक गोल्ड मेडल विजेता
कुछ समय बाद बलबीर अमृतसर के खालसा कॉलेज में आ गए। वर्ष 1942-43 में बलबीर सिंह को पंजाब यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया। यहीं से उनकी सफलता का दौर शुरू हो गया। बकौल, बलबीर एक बार खेलते समय उन्हें पंजाब पुलिस के चीफ सर जॉन ने देख लिया था। उन्होंने पुलिस की तरफ से खेलने के लिए कहा, लेकिन बलबीर वहां से भागकर दिल्ली आ गए।