न समाज की सुनी, न परंपरा आड़े आने दी। पिता की अंतिम इच्छा जो पूरी करनी थी, बस ये सोचते हुए 3 बेटियों ने ही बेटे का फर्ज निभाया, देखिए तस्वीरें।
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अजमेर सिंह औलख का अंतिम संस्कार
प्रसिद्ध नाटककार प्रो. अजमेर सिंह औलख का शुक्रवार को मानसा जिले के रामबाग में इंकलाबी नारों और गीतों की गुनगुनाहट के बीच अंतिम संस्कार कर दिया गया। अर्थी को उनकी बेटियों सुपनदीप कौर, सोहज प्रीत कौर और अजमीत कौर ने कंधा दिया और फिर चिता को मुखाग्नि भी दी। इस दौरान उनकी मां भी बेटियों के साथ रही और इस काम में पूरा सहयोग किया।
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अजमेर सिंह औलख का अंतिम संस्कार
संस्कार से पहले मजदूर और किसान जत्थेबंदियों की अगुवाई में शहर में इंकलाबी नारों के साथ प्रो. औलख की शवयात्रा निकाली गई। बाद में बिना किसी धार्मिक रस्म के इंकलाबी नारों व गीतों के बोलों के बीच उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। अंतिम दर्शनों के लिए किसान जत्थेबंदियां, लेखक, प्रशासनिक अधिकारी, मजदूर जत्थेबंदियां और राजनीतिक पार्टियों के सदस्य पहुंचे।
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अजमेर सिंह औलख का अंतिम संस्कार
बता दें कि प्रो. अजमेर सिंह औलख का वीरवार सुबह उनके निवास स्थान पर निधन हो गया था। वे लंबे समय से कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे। अजमेर औलख को साल 2008 में कैंसर की बीमारी का पता चला था, जिसके चलते उनकी रीड की हड्डी में तकलीफ शुरू हो गई थी। वे पिछले एक महीने से फोर्टिस अस्पताल में भर्ती थे और एक हफ्ता पहले ही डिस्चार्ज हुए थे। उनके इलाज का सारा खर्च पंजाब सरकार ने उठाया था।
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अजमेर सिंह औलख का अंतिम संस्कार
अजमेर सिंह औलख पंजाबी भाषा के विख्यात साहित्यकार रहे। औलख का जन्म 19 अगस्त 1942 को पंजाब के मानसा जिले के गांव कुंभड़वाल में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री कौर सिंह और माता का नाम श्रीमती हरनाम कौर था। वह एक आदर्श अध्यापक थे। गांव किशनगढ़ फरमाही, भीखी और पटियाला में पढ़ाई करने के बाद अजमेर औलख मानसा के नेहरू कॉलेज में प्रोफेसर बने।