क्या रात भर आपका पार्टनर आपकी खर्राटों की वजह से सो नहीं पाता तो इन दस तरीकों को अपनाकर इनसे छुटकारा पा सकते हैं, देखिए।
खर्राटों से बढ़ सकती हैं ये परेशानियां
पीजीआई में ईएनटी डिपार्टमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संदीप बंसल कहते हैं कि खर्राटे से ज्यादा यह खतरनाक है कि सोते वक्त कितनी बार सांस रुकती है। सांस रुकने के लक्षण के चिकित्सा भाषा में आब्स्ट्रेक्टिव स्लीप अपनिया (ओएसए) कहते हैं। यदि सोते वक्त सांस रुकती है तो कई दूसरी गंभीर बीमारियां हो सकती है। इसके बारे में तभी पता चल सकता है, जब व्यक्ति की जांच की जाए।
खर्राटे की एक वजह मोटापा है। बढ़े हुए मांस के कारण लेटते समय सांस की नली सिकुड़ जाती है। जब हवा सिकुड़ी नली से गुजरती है तो आसपास के टिश्यू कंपन पैदा करते हैं, जिससे खर्राटे आते हैं। नाक में कफ, संक्रमण, नाक की हड्डी का बढ़ना या नाक में किसी प्रकार के श्वसन मार्ग के अवरोध के कारण भी खर्राटे आते हैं। गले की तकलीफ से भी खर्राटे आ सकते हैं। कई बार गले में खराश, कफ का जम जाना, टांसिल में सूजन व संक्रमण से भी खर्राटे आते हैं।
उम्र का बढ़ना भी एक कारण है। उम्र के साथ गले के टिश्यू कमजोर होते हैं। इससे अधिक कंपन होते और खर्राटे आने लगते हैं। कई बार सांस लेने वाली नली संकरी और कमजोर होती है। जब सांस लेते हैं तो आसपास के टिश्यू कंपन पैदा करते हैं। इससे खर्राटे आते हैं। नीचे वाले जबड़ों का छोटा होना भी एक कारण हैं, लेकिन ऐसे केस साउथ एशिया में ज्यादा पाए जाते हैं। सोने से पहले अधिक शराब पीने या नींद की दवा लेने से भी खर्राटे आने की संभावना बढ़ती है।
धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों में खर्राटे लेने की संभावना सामान्य व्यक्तियों से ज्यादा होती है। धूम्रपान से सांस की नली में सूजन आती है इससे श्वसन मार्ग संकरा होता और खर्राटे आने लगते हैं। कई लोग पीठ के बल सोते हैं। जिससे जीभ पीछे की तरफ हो जाती है जो तालु के पीछे लटके हुए से लगती है। जिससे सांस की नली में रुकावट बनती है और खर्राटे आना चालू होते हैं।