{"_id":"6aa8dc179d3f1344ac0c1ec4","slug":"daddumajra-remains-far-from-garbage-free-15-000-tonne-waste-pile-accumulates-101-crore-expenditure-2026-09-15","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"कचरा मुक्त नहीं हुआ डड्डूमाजरा: 15 हजार टन कचरे का ढेर फिर जमा, 101 करोड़ के खर्च के बाद भी लोग बेहाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कचरा मुक्त नहीं हुआ डड्डूमाजरा: 15 हजार टन कचरे का ढेर फिर जमा, 101 करोड़ के खर्च के बाद भी लोग बेहाल
Tue, 15 Sep 2026 11:26 AM IST
Nivedita
राजबीर सिंह राणा, संवाद, चंडीगढ़
राजबीर सिंह राणा, संवाद, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Tue, 15 Sep 2026 11:26 AM IST
सार
चंडीगढ़ नगर निगम डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड में लगे नए कचरे के पहाड़ को हटाने के लिए 65 लाख रुपये खर्च करेगा। प्रस्ताव के मुताबिक 15 अक्तूबर तक कचरे को प्रोसेस करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि रोजाना 80 टन नया कचरा आने से यह लक्ष्य चुनौतीपूर्ण है।
विज्ञापन
डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड में फिर जमा हुआ कचरा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
चंडीगढ़ में डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड में कचरे का पहाड़ खत्म करने के लिए नगर निगम करीब 101 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है लेकिन लोगों की परेशानी अभी खत्म नहीं हुई है। कंपोस्ट प्लांट के अंदर और आसपास मिक्स कचरे का एक और पहाड़ खड़ा हो गया है।
निगम के अनुसार यहां 15 हजार टन से ज्यादा कचरा डंप है। बरसात में इससे निकलने वाले लीचेट (कचरे से रिसने वाला गंदा पानी) की बदबू से डड्डूमाजरा कॉलोनी के लोग परेशान हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कचरे के इस ढेर को प्रशासन और निगम ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के समक्ष भी छिपाया। हाईकोर्ट के लोकल कमिश्नर के निरीक्षण के दौरान भी उन्हें इसकी जानकारी नहीं दी गई।
विज्ञापन
निगम के अनुसार यहां 15 हजार टन से ज्यादा कचरा डंप है। बरसात में इससे निकलने वाले लीचेट (कचरे से रिसने वाला गंदा पानी) की बदबू से डड्डूमाजरा कॉलोनी के लोग परेशान हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कचरे के इस ढेर को प्रशासन और निगम ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के समक्ष भी छिपाया। हाईकोर्ट के लोकल कमिश्नर के निरीक्षण के दौरान भी उन्हें इसकी जानकारी नहीं दी गई।
विज्ञापन
शेड भर गया, आसपास फैलाया कचरा
कंपोस्ट प्लांट के पास बना शेड कचरे से ऊपर तक भरा हुआ है। जगह कम पड़ने पर कचरा प्लांट के आसपास फैला दिया गया है। इससे साफ है कि डंपिंग ग्राउंड अभी पूरी तरह कचरा मुक्त नहीं हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के दिनों में बदबू और गंदे पानी की समस्या और बढ़ जाती है। वहीं, निगम की सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट टीम कागजों में क्लीयरेंस दिखा रही है।
मशीनें नहीं चलीं, बढ़ता गया कचरे का ढेर
डंपिंग ग्राउंड के पुराने तीन कचरे के पहाड़ों को प्रोसेस कर हटाने पर निगम करीब 101 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। इसके बावजूद मिक्स कचरे का नया ढेर बन गया। बरसात में गीले-सूखे कचरे की प्रोसेसिंग करने वाली मशीनें नहीं चल सकीं। इससे रोजाना शहर से निकलने वाला करीब 80 टन मिक्स कचरा डंप होता रहा। ढाई साल पहले लगाई गई मशीनरी भी नियमित रूप से नहीं चल सकी।
इस तरह लग गया ढेर
कुछ कचरा सेक्टर-25 के ड्राई वेस्ट प्लांट में भेजा जाता रहा लेकिन वहां से भी कचरा वापस डंपिंग ग्राउंड पहुंचता रहा। कचरे के इस चक्कर से समस्या बनी रही।
15 अक्तूबर तक प्रोसेसिंग का लक्ष्य
नगर निगम अब इस नए कचरे के पहाड़ को हटाने के लिए 65 लाख रुपये खर्च करेगा। प्रस्ताव के मुताबिक 15 अक्तूबर तक कचरे को प्रोसेस करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि रोजाना 80 टन नया कचरा आने से यह लक्ष्य चुनौतीपूर्ण है। अभी मिक्स कचरे की प्रोसेसिंग करने वाली कंपनी ने काम शुरू नहीं किया है।
दूसरी एजेंसी को तीन साल का जिम्मा
प्लांट के बार-बार खराब होने की समस्या से निपटने के लिए निगम ने दूसरी एजेंसी को मेंटेनेंस और ऑपरेशन का काम तीन साल के लिए अलॉट किया है। निगम को उम्मीद है कि नई एजेंसी के संचालन से मिक्स कचरे की प्रोसेसिंग नियमित हो सकेगी।
मिक्स करने का प्लांट काफी दिनों से ठीक से वर्किंग नहीं होने से कचरा वहीं डंप होता गया। बरसातों में ज्यादा गीली कचरा आने से भी प्रोसेसिंग नहीं हो सकी। इसलिए भी कचरा डंप हो गया। इसे 15 अक्तूबर तक प्रोसेस करना है। इसके लिए 65 लाख का टेंडर लगाया है। -संजय अरोड़ा, चीफ इंजीनियर, नगर निगम
कंपोस्ट प्लांट के पास बना शेड कचरे से ऊपर तक भरा हुआ है। जगह कम पड़ने पर कचरा प्लांट के आसपास फैला दिया गया है। इससे साफ है कि डंपिंग ग्राउंड अभी पूरी तरह कचरा मुक्त नहीं हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के दिनों में बदबू और गंदे पानी की समस्या और बढ़ जाती है। वहीं, निगम की सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट टीम कागजों में क्लीयरेंस दिखा रही है।
मशीनें नहीं चलीं, बढ़ता गया कचरे का ढेर
डंपिंग ग्राउंड के पुराने तीन कचरे के पहाड़ों को प्रोसेस कर हटाने पर निगम करीब 101 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। इसके बावजूद मिक्स कचरे का नया ढेर बन गया। बरसात में गीले-सूखे कचरे की प्रोसेसिंग करने वाली मशीनें नहीं चल सकीं। इससे रोजाना शहर से निकलने वाला करीब 80 टन मिक्स कचरा डंप होता रहा। ढाई साल पहले लगाई गई मशीनरी भी नियमित रूप से नहीं चल सकी।
इस तरह लग गया ढेर
कुछ कचरा सेक्टर-25 के ड्राई वेस्ट प्लांट में भेजा जाता रहा लेकिन वहां से भी कचरा वापस डंपिंग ग्राउंड पहुंचता रहा। कचरे के इस चक्कर से समस्या बनी रही।
15 अक्तूबर तक प्रोसेसिंग का लक्ष्य
नगर निगम अब इस नए कचरे के पहाड़ को हटाने के लिए 65 लाख रुपये खर्च करेगा। प्रस्ताव के मुताबिक 15 अक्तूबर तक कचरे को प्रोसेस करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि रोजाना 80 टन नया कचरा आने से यह लक्ष्य चुनौतीपूर्ण है। अभी मिक्स कचरे की प्रोसेसिंग करने वाली कंपनी ने काम शुरू नहीं किया है।
दूसरी एजेंसी को तीन साल का जिम्मा
प्लांट के बार-बार खराब होने की समस्या से निपटने के लिए निगम ने दूसरी एजेंसी को मेंटेनेंस और ऑपरेशन का काम तीन साल के लिए अलॉट किया है। निगम को उम्मीद है कि नई एजेंसी के संचालन से मिक्स कचरे की प्रोसेसिंग नियमित हो सकेगी।
मिक्स करने का प्लांट काफी दिनों से ठीक से वर्किंग नहीं होने से कचरा वहीं डंप होता गया। बरसातों में ज्यादा गीली कचरा आने से भी प्रोसेसिंग नहीं हो सकी। इसलिए भी कचरा डंप हो गया। इसे 15 अक्तूबर तक प्रोसेस करना है। इसके लिए 65 लाख का टेंडर लगाया है। -संजय अरोड़ा, चीफ इंजीनियर, नगर निगम