सलवार सूट पहनकर खली की चेली को धोया था और अब वह देश की पहली महिला डब्ल्यूडब्ल्यूई रेसलर है, लेकिन कभी उन्होंने जहर खा लिया था जानिए क्यों?
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डब्ल्यूडब्ल्यूई रेसलर कविता दलाल
सूट-सलवार में विदेशी पहलवान को धूल चटाने वाली अंतरराष्ट्रीय रेसलर कविता ने संघर्ष से अपनी एक अलग पहचान बना ली है। डब्ल्यूडब्ल्यूई में देश की पहली महिला रेसलर कविता को कामयाबी के शिखर तक पहुंचाने वाले माता-पिता और भाई के जेल जाने और डोपिंग के दंश से उसके कैरियर पर ब्रेक लग गया था।
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डब्ल्यूडब्ल्यूई रेसलर कविता दलाल
संघर्ष के दिनों में कविता ने जहर खाकर आत्महत्या करने की भी ठान ली थी। ऐसी विकट परिस्थितियों पर कविता ने पार पाया और सफलता पाई। जींद जिले के मालवी गांव की कविता ने अमर उजाला कार्यालय में अपने संघर्ष की कहानी सांझा की। किसान परिवार में जन्मी और पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी कविता ने जुलाना के स्कूल में 12वीं तक पढ़ाई की।
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लेडी खली पहलवान कविता दलाल
2005 में बीए पूरी की। इसी बीच वह वेट लिफ्टिंग के खेल से जुड़ गई। कविता के बड़े भाई संजय दलाल हमेशा सपोर्ट बनकर खड़े रहे। 2008 में वह डोपिंग के आरोप घिर गई और जापान में एशियन चैंपियन में डोपिंग के कारण उस पर चार साल का बैन लग गया। 2009 में परिवार ने यूपी के बागपत जिले के एसएसबी में कार्यरत गौरव तोमर से कविता की शादी कर दी।
बैन के दंश को कविता भूली भी नहीं थी कि 2010 में उनकी भाभी की मौत के बाद मां-बाप और भाई जेल चले गए। यह समय कविता के लिए बहुत मुश्किल रहा। सपोर्ट बनकर साथ खड़े रहने वाले भाई जेल चले गए और नई शादी के कारण ससुराल में भी तालमेल नहीं हो सका।