तीन तलाक पर देश में बहस छिड़ी हुई है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस्लाम में पुरुषों की तरह महिलाओं को भी एक अधिकार उन्हें भी दिया गया है। नहीं तो यहां जान लीजिए।
2 of 6
ट्रिपल तलाक
- फोटो : social media
मिशनरी ऑफ अहमदिया मुस्लिम अमृतसर के मिशनरी ताहिर अहमद शमीम बताते हैं कि इस्लाम में जहां पुरुषों को तलाक देने का अधिकार है, वहीं महिलाएं भी खुलअ दे सकती हैं। महिलाएं खुलअ देकर पति से अलग रह सकती हैं और उनसे खुलअ देने का कारण भी नहीं पूछा जा सकता।
शमीम ने बताया कि अलबकरा 229 के अनुसार महिलाओं का पुरुषों पर उतना ही अधिकार है, जितना पुरुषों का उन पर। वहीं अलबकरा 230 के अनुसार एक साथ तीन बार तलाक, तलाक, तलाक कहना एक ही बार गिना जाएगा। तलाक देने वाला पुरुष होश में हो या क्रोध में। वह दो गवाहों की उपस्थिति में तलाक देगा, तभी वह तलाक माना जाएगा।
शमीम ने बताया कि एक बार तलाक बोल देने पर ही पुरुष महिला को छोड़ नहीं सकता। उन्हें तीन महीने इकट्ठा रहना होगा। तीन माह के अंदर अगर साथ रहने की सहमति नहीं बनती तो उसे पत्नी को उसके मायके छोड़कर आना होगा। तभी इसे पूर्ण तलाक माना जाता है। अगर 90 दिनों में दोनों के बीच सलाह हो जाती है तो बिना किसी की दखलअंदाजी के वे इकट्ठे रह सकते हैं।
दूसरी बार तलाक बोलने पर भी ऐसा करना होगा। लेकिन अगर पति तीसरी बार तलाक शब्द का प्रयोग कर लेता है तो महिला अपने पति के पास वापिस नहीं आ सकती और तीन माह की प्रक्रिया से भी उसे नहीं गुजरना होगा। तीन बार तलाक की प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद महिला किसी अन्य व्यक्ति से विवाह कर सकती है। लेकिन दूसरे पति के तलाक देने या उसके मर जाने के बाद चाहे तो पहला पति उससे दोबारा निकाह कर सकता है।