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सड़क किनारे मिलने वाला गन्ने का जूस पीते हैं, संभल जाएं बड़े खतरे में हैं आप

Fri, 12 Jan 2018 09:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 12 Jan 2018 09:30 AM IST
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sugar cane juice from road side may harm health
गन्ने का जूस
अगर लगता है कि सड़क किनारे मिलने वाला गन्ने का जूस प्यास बुझाएगा और फायदेमंद भी है तो गलत हैं आप। संभल जाएं, सच्चाई होश उड़ा देगी।
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गन्ने का जूस
हकीकत यह है कि गन्ने का रस और बर्फ दोनों के प्रभाव अलग है। यदि आप जरा-सी सावधानी बरतेंगे तो बीमारी से बच सकते हैं। गन्ने का रस पीने से पहले एक बार देखिए कि वह बनता कैसे है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कई बार गन्ने की सफाई नहीं की जाती। गन्ने की सफाई न होने की वजह से उस पर काली फफूंद लग जाती है।
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गन्ने का जूस
इसके अलावा हो सकता है कि जिस गन्ने का जूस आप पी रहे हों, उस पर खेतों की मिट्टी न हटाई गई हो। या नींबू धब्बेदार हो या फिर उसके बीज भी नहीं निकाले गए हो। इसके आलावा क्या आपने कभी यह चेक किया कि जिन हाथों से ऐसा किया जा रहा है वह साफ हैं या नहीं। उन्हीं हाथों से गन्ना पकड़ा जाता है, जनरेटर चलाया जाता है मशीन को घुमाया जाता है। हाथ कभी धोए नहीं जाते। बस यहीं से बीमारी के सारे लक्षण शुरू हो जाते हैं।
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गन्ने का जूस
बॉटनी एक्सपर्ट डॉ. अवनीश पाण्डेय के अनुसार, गन्ने में अगर लालिमा है तो इसके रस मत पीजिए। उसे गन्ने की सड़ांध या रेड रॉट डिजीज कहा जाता है। यह एक तरह का फंगस है, जो गन्ने के रस को लाल कर देता है। इससे जूस की मिठास भी कम हो जाती है। फफूंद से हेपेटाइटिस ए, डायरिया और पेट की बीमारियां होती हैं। इसी प्रकार गन्ने की मिट्टी से भी पेट संबंधी बीमारियां होती हैं। ऐसा गन्ना सस्ता मिलता है और सेहत के लिए नुकसानदायक होता है।
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गन्ने का जूस
जनरल फिजिशियन डॉ. मनीष जैन कहते हैं कि अगर गन्ने का रस बनाते समय साफ सफाई का ध्यान न रखा जाए तो ज्वाइंडिस, हेपेटाइटिस, टायफायड, डायरिया जैसी बीमारियां हो सकती हैं। अक्सर जहां से आप गन्ने का रस लेते हैं वहां गन्नों की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया जाता। रास्तों में खड़ी किसी भी रेहड़ी से गन्ने का जूस न पीयें, इससे संक्रमण होने का खतरा होता है।
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