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Tokyo Olympic 2021: प्रेरक है लकवा को हरा सबसे कम उम्र में ओलंपिक खेलने वाली पहलवान सोनम मलिक की कहानी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा)
Published by: ajay kumar
Updated Fri, 23 Jul 2021 04:07 PM IST
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टोक्यो ओलंपिक 2021: सोनम मलिक
- फोटो : अमर उजाला
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जब तक हौंसला कायम होता है, तब तक बड़ी से बड़ी बाधा भी मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती है। ऐसी ही बाधाओं को पार करते हुए सोनीपत के मदीना गांव की पहलवान सोनम मलिक आज कुश्ती का बड़ा चेहरा बनी है। सोनम को चार साल पहले लकवा मारने पर छह महीने के लिए बिस्तर पर रहना पड़ा और डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि वह अब खेल नहीं सकती है। उसके बाद भी सोनम ने हिम्मत नहीं हारी और वह दोबारा खड़ी होकर अखाड़े में उतरी। जहां उन्होंने देश के सबसे युवा एथलीट का सम्मान प्राप्त किया, वहीं सबसे कम उम्र में ओलंपिक खेलेगी और विश्व के दिग्गज पहलवानों के सामने चुनौती बनकर खड़ी होंगी। यह खिलाड़ी न हार से डरती है और ना ही चोट लगने के भय से मैदान से दूर भागती है। ओलंपिक कोटा हासिल करना सोनम के लिए सहज नहीं था। वह नेशनल ट्रायल में लडऩे के लिए कैडेट से सीनियर में उतरी, ऐसे में फेडरेशन को लिखकर देना पड़ा कि अगर कुश्ती के दौरान कुछ होता है तो उसका जिम्मेदार सोनम एवं परिवार खुद होगा।
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टोक्यो ओलंपिक 2021: सोनम मलिक
- फोटो : अमर उजाला
सोनम ने ओलंपिक मेडलिस्ट साक्षी मलिक को चार बार हराकर अपनी प्रतिभा साबित की। सोनम बताती है कि वर्ष 2017 में हाथ में लकवा मारने के बाद भी वह कमजोर नहीं पड़ी। वह छह माह तक बिस्तर पर रही। चिकित्सकों ने अंदेशा जताया था कि अब वह शायद कुश्ती नहीं कर सकेगी लेकिन सोनम ने हिम्मत नहीं हारी। पहले शारीरिक मजबूती बनाई फिर अभ्यास कर खुद को खेल के लिए तैयार किया।
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टोक्यो ओलंपिक 2021: सोनम मलिक
- फोटो : अमर उजाला
सोनम मलिक ने शारीरिक मजबूती के लिए कड़ी मेहनत की। सुबह जल्दी उठने के बाद एक घंटा प्रणायाम, उसके बाद पनीर, बादाम व दूध लिया। पत्ता रहित सब्जी का सेवन के साथ ही दूध एवं दही नियमित अंतराल में लेती हैं। तनाव दूर करने के लिए लॉन टेनिस और वालीबाल खेलती है और सुबह मेडिटेशन करती रही।
सोनम ने कुश्ती के हर दांव में खुद को बेहतर बनाने के लिए न केवल अपने विपक्षी पहलवान, बल्कि ओलंपिक से लेकर विश्व चैंपियन पहलवान के वीडियो तक देखें हैं फिर खुद पार्टनर के साथ उस दांव पर अभ्यास किया। लॉकडाउन में अपने भाई मोहित को भी पार्टनर बना अभ्यास किया।
ओलंपिक कोटा हासिल करने के दौरान घुटने में लगी चोट के कारण सोनम ने गांव में ही रहकर अभ्यास किया। उनका अभ्यास दो मुख्य चरणों में चला। एक ओर खुद की फिटनेस बनाने पर जोर दिया, वहीं ग्राउंड रेसलिंग को छोडक़र अपर बॉडी रेसलिंग पर अभी ध्यान दिया। सोनम से हर किसी को पदक की बड़ी उम्मीद है और सोनम उस उम्मीद पर खरा उतरना चाहती हैं। इसके लिए ही वह अपना हर दांव मजबूत करके खेलने उतरेंगी, जिससे देश के लिए पदक जीत सके।
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