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गणेश चतुर्थी 2026: इस बार सोमवार के साथ ब्रह्म योग का शुभ संयोग, जानें विघ्नहर्ता के पूजन का शुभ मुहूर्त

Tue, 08 Sep 2026 12:25 PM IST
Nivedita संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Tue, 08 Sep 2026 12:25 PM IST
सार

चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह करीब 7:06 बजे शुरू होगी और 15 सितंबर को सुबह 7:44 बजे तक रहेगी। भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल में माना जाता है, इसलिए गणेश चतुर्थी पर मध्याह्न पूजा का विशेष महत्व है।

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Ganesh Chaturthi 2026 auspicious alignment of Monday and Brahma Yoga auspicious timings for worshipping
चंडीगढ़ के शिव बैकुंठ धाम में गणेश चतुर्थी के लिए मूर्तियां बनाते कलाकार। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विघ्नहर्ता भगवान गणेश की आराधना का पर्व गणेश चतुर्थी इस बार ब्रह्म योग के शुभ संयोग में मनाया जाएगा। 14 सितंबर दिन सोमवार को पड़ रही गणेश चतुर्थी पर चतुर्थी तिथि के साथ ब्रह्म योग का संयोग बन रहा है। 

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सेक्टर 18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी पंडित अशोक पांडेय ने कहा कि सोमवार, चतुर्थी तिथि और ब्रह्म योग का यह संयोग गणपति पूजन के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन श्रद्धालु भगवान गणेश की स्थापना कर बुद्धि, विवेक, सुख-समृद्धि और सभी प्रकार के विघ्नों से मुक्ति की कामना करेंगे।
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चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह करीब 7:06 बजे शुरू होगी और 15 सितंबर को सुबह 7:44 बजे तक रहेगी। भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल में माना जाता है, इसलिए गणेश चतुर्थी पर मध्याह्न पूजा का विशेष महत्व है। चंडीगढ़ में गणेश पूजन का विशेष शुभ मुहूर्त सुबह 11:04 बजे से दोपहर 1:33 बजे तक रहेगा।
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दोपहर 12:45 बजे तक रहेगा ब्रह्म योग गणेश चतुर्थी के दिन ब्रह्म योग दोपहर 12:45 बजे तक रहेगा। वहीं चित्रा नक्षत्र दोपहर 1:55 बजे तक रहेगा। ऐसे में ब्रह्म योग के दौरान गणपति पूजन, संकल्प और मंत्र जाप को विशेष शुभ माना जा रहा है। श्रद्धालु इस दौरान भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सकेंगे।

दूर्वा और मोदक से करें गणपति का पूजन 
सेक्टर 30 के शिव शक्ति मंदिर के पुजारी जितेंद्र तिवारी ने बताया कि भगवान गणेश बुद्धि, विवेक, समृद्धि और सौभाग्य के देवता हैं। किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेश जी का पूजन करने की परंपरा है। गणेश चतुर्थी पर श्रद्धालु प्रातः स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करेंगे। इसके बाद पंचोपचार या षोडशोपचार विधि से पूजा की जानी चाहिए।


सेक्टर 15 के पंडित राम बहादुर मिश्र ने बताया कि गणेशजी को दूर्वा, लाल पुष्प, सिंदूर, अक्षत, मोदक और लड्डू अर्पित किया जाना चाहिए। गणेश अथर्वशीर्ष, गणेश स्तोत्र और मंत्रों का जाप कर परिवार की सुख-शांति, आरोग्य और समृद्धि की प्रार्थना से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

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