फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

शहीदी दिवस: मौका मिलने पर भी जेल से भागे नहीं थे भगत सिंह, जानिए 8 अनकही बातें

Fri, 22 Mar 2019 02:32 PM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 22 Mar 2019 02:32 PM IST
विज्ञापन
shaheedi diwas, Martyrs Day, 23 March 1931, shaheed-e-azam bhagat singh untold facts
भगत सिंह
शहीद-ए-आजम भगत सिंह को जेल से भागने का मौका मिला था, लेकिन वे भागे नहीं। जानिए उनके निजी जीवन से जुड़ी 8 अनकही बातें और वो जवाब जो उन्होंने चिट्ठी पढ़ने के बाद दिया।
shaheedi diwas, Martyrs Day, 23 March 1931, shaheed-e-azam bhagat singh untold facts
भगत सिंह शहीदी दिवस
भागने का मौका मिला, पर भागे नहीं
लाहौर जेल में कैद भगत सिंह को एक चिट्ठी मिली, जिसमें लिखा था कि हमने अपने भागने के लिए एक रास्ता बनाया है, लेकिन हम चाहते हैं कि हमारी जगह आप उससे निकल जाएं। चिट्ठी का जवाब देते हुए भगत सिंह ने कहा कि- धन्यवाद.....मैं आपका आभारी हूं, लेकिन ये आग्रह स्वीकार नहीं कर सकता। अगर ऐसा किया तो मेरे जीने का मकसद ही खत्म हो जाएगा। मैं चाहता हूं कि मेरी शहादत देश के काम आए और युवाओं में प्रेरणा व जोश भरने का काम करे, जिससे देश को जल्द से जल्द आजादी मिल सके।
shaheedi diwas, Martyrs Day, 23 March 1931, shaheed-e-azam bhagat singh untold facts
भगत सिंह शहीदी दिवस
महात्मा गांधी का सम्मान, पर अहिंसावादी नीति पसंद नहीं थी
आठ वर्ष की उम्र में जब बच्चों को खिलौनों का शौक होता है, भगत सिंह अपने पिता से पूछते थे कि अंग्रेजों को भगाने के लिए क्यों न खेतों में पिस्तौलें उगाएं। पिस्तौलों की जो फसल उगेगी, उससे अंग्रेजों को आसानी से भारत से भगाया जा सकेगा। उस दौर में पंजाब में अराजकता का माहौल था। 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग की घटना हुई तो भगत सिंह मात्र 12 वर्ष के थे। 10 मिनट की गोलीबारी में 379 लोगों की मौत हुई और 2000 के करीब घायल हुए। हालांकि मृतकों की संख्या 1000 से अधिक बताई जाती है। वे महात्मा गांधी का सम्मान तो बहुत करते थे, लेकिन उनकी अहिंसा वाली पद्धति से बहुत निराश थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
shaheedi diwas, Martyrs Day, 23 March 1931, shaheed-e-azam bhagat singh untold facts
भगत सिंह शहीदी दिवस
लाला लाजपत राय की मौत का बदला लिया
1928 में साइमन कमीशन का बहिष्कार करने के लिए हो रहे प्रदर्शन पर अंग्रेजी शासन ने लाठीचार्ज किया। इसमें लाला लाजपत राय की मृत्यु हो गयी। इसका बदला लेने के लिए 17 दिसंबर 1928 को करीब सवा चार बजे, एएसपी सॉण्डर्स के आते ही राजगुरु ने एक गोली सीधी उसके सिर में मारी। इसके बाद भगत सिंह ने 3-4 गोली दाग दीं। ये दोनों जैसे ही भाग रहे थे कि सिपाही चनन सिंह ने इनका पीछा करना शुरू कर दिया। चन्द्रशेखर आजाद ने उसे सावधान किया - आगे बढ़े तो गोली मार दूंगा। नहीं मानने पर आजाद ने उसे गोली मार दी। इस तरह इन लोगों ने लाला लाजपत राय की मौत का बदला ले लिया।
विज्ञापन
shaheedi diwas, Martyrs Day, 23 March 1931, shaheed-e-azam bhagat singh untold facts
भगत सिंह शहीदी दिवस
भगत सिंह को आती थीं कई भाषाएं
भगत सिंह का पैतृक गांव खटकड़कलां है। इनकी पढ़ाई लाहौर के डीएवी हाई स्कूल में हुई। वे कई भाषाओं के धनी थे। अंग्रेजी, हिन्दी, उर्दू के अलावा पंजाबी पर भी उनकी खास पकड़ थी। कॉलेज में भगत सिंह ने इंडियन नेशनल यूथ आर्गनाइजेशन का गठन किया। अच्छे थियेटर आर्टिस्ट होने के साथ-साथ उनका शैक्षणिक रिकार्ड भी बढ़िया रहा। स्टेज पर उनका प्रदर्शन राणा प्रताप, सम्राट चंद्रगुप्त और भारत की दुर्दशा दिखाता था। बाद में भगत सिंह ने अपने इस हुनर का इस्तेमाल भारतीयों के बीच देशभक्ति की भावनाएं जगाने में किया। भगत सिंह ने एक क्रांतिकारी लेखक का रोल भी अदा किया।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed