हम आपको एक ऐसे शख्स से मिला रहे हैं, जिसने दुबई में फांसी की सजा पाए 5 भारतीयों को बचाया और उन्हें नई जिंदगी दी। देखिए कैसे किया ये सब?
शारजाह में 20 लाख रुपये ब्लड मनी देकर फांसी की सजा माफ होने के बाद पांच भारतीय शुक्रवार को देश लौट आए। इनमें चार पंजाबी हैं। माफीनामा शारजाह अदालत में सरबत दा भला चैरिटेबल ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी डॉ. एसपीएस ओबराय की तरफ से पिछले साल अक्तूबर महीने में दाखिल किया गया था। फांसी की सजा माफ होने के बाद अदालत ने सभी को 3 साल की सजा सुनाई। ये सभी 6 साल से जेल में थे, इसलिए इन्हें तुरंत छोड़ दिया गया।
शारजाह में शराब के अवैध धंधे में शामिल लोगों ने झगड़ा होने पर 4 नवंबर 2011 को यूपी के आजमगढ़ के शेखूपुरा गांव के वरिंदर चौहान (38) की हत्या कर दी थी। इस मामले में बिहार के छपरा निवासी धर्मेंद्र, अमृतसर के अजनाला के हरविंदर सिंह, नवांशहर के जींसरा गांव के रणजीत राम, होशियारपुर के मालपुर गांव के दलविंदर सिंह और पटियाला के जसोमाजरा गांव के सुच्चा सिंह को चार नवंबर 2011 को शारजाह की अदालत में दोषी करार दिया गया था।
मृतक के परिवार से संपर्क कर कराया समझौता
डॉ. ओबराय ने बताया कि दोषियों के माता-पिता ने उनके साथ संपर्क किया था। इसके बाद उन्होंने यूपी में मृतक के परिवार के लोगों से बात करके समझौता करवाया। यह समझौता अक्तूबर 2017 में हुआ। वे खुद यूपी गए और वरिंदर के परिवार को 20 लाख रुपये ब्लड मनी दी। इसमें 5 लाख रुपये की मदद उनकी संस्था ने की। इंडियन कांसुलेट के अधिकारी जसपाल सिंह आहुजा ने टेंपरेरी पासपोर्ट और टिकटों का 24 घंटे में प्रबंध कराया।
जिक्र योग्य है कि डॉ. ओबराय की तरफ से अब तक ब्लड मनी के पैसों का भुगतान करके 88 व्यक्तियों की जान बचाई है। इनमें पंजाब के 64, हैदराबाद के तीन, हरियाणा, गुजरात, बिहार, महाराष्ट्र के एक-एक और बाकी पाकिस्तान, बांग्लादेश और फिलिपींस के लोग शामिल हैं।