पाकिस्तान की कोट लखपत जेल में कैद रहे भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह की मौत आज ही के दिन हुई थी। पढ़िए उनकी दर्द भरी दास्तां...
भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह की मौत 2 मई 2013 को हुई थी। साल 1990 में पाक की सुप्रीम कोर्ट ने सरबजीत सिंह को लाहौर और फ़ैसलाबाद में हुए 4 बम धमाकों के आरोप में सजा सुनाई थी। इन धमाकों में करीब 10 लोगों की मौत हुई थी। लाहौर की सेंट्रल जेल में कुछ कैदियों ने सरबजीत पर हमला कर दिया था और 5 दिन बाद अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ दिया।
सरबजीत सिंह भारत-पाकिस्तान सीमा पर बसे तरनतारन जिले के भिखीविंड गांव का रहने वाला किसान था। 30 अगस्त 1990 को वह अनजाने में पाकिस्तानी सीमा में पहुंच गया था, जहां से उसे पाक आर्मी ने गिरफ्तार कर लिया। उस समय सरबजीत ने तर्क दिया कि वह गलती से सीमा पार कर पाकिस्तान पहुंच गया था।
1991 में बम धमाकों का लगा था आरोप
लाहौर और फैसलाबाद में हुए बम धमाके का आरोपी बनाकर सरबजीत सिंह को जेल में कैद कर दिया गया। 1991 में बम धमाके आरोप में सरबजीत सिंह को फांसी की सजा सुनाई गई। मार्च 2006 में पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने सरबजीत की दया याचिका खारिज करते हुए उन्हें सुनाई गई मौत की सजा को बरकरार रखा।
सरबजीत के परिवार में बहन दलबीर, पत्नी सुखप्रीत कौर और 2 बेटियां स्वप्न और पूनम कौर हैं। सरबजीत की बहन दलबीर कौर ने भी अपने भाई की रिहाई के लिए पूरी कोशिशें की लेकिन नाकाम रहीं।