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मोहम्मद रफी की जिंदगी का एक राज, जिसे शायद ही कोई जानता हो

Tue, 01 Aug 2017 09:17 AM IST
रमेश शुक्ला सफर/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
रमेश शुक्ला सफर/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब) Updated Tue, 01 Aug 2017 09:17 AM IST
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renowned singer mohammad rafi life secret related to 1962 indo china war
रफी - फोटो : SELF
देश के महान फनकार मोहम्मद रफी ने 31 जुलाई को दुनिया को अलविदा कहा। आज उनकी पुण्यति​थि पर जानिए उनकी ​जिंदगी से जुड़ा एक ऐसा राज, जिसे शायद ही कोई जानता हो। 
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mohammad rafi
मोहम्मद रफी ने 1962 में चीन के खिलाफ अपने गीतों से जंग लड़ी थी। चौंक गए यह बात जानकर, पर ये एक सच है। दरअसल, मोहम्मद रफी चीन के खिलाफ युद्ध लड़ रहे भारतीय सैनिकों का हौसला बढ़ाने के लिए जंग के मैदान पर गए थे। रफी की जीवनी के मुताबिक, चीन ने जब हिंदुस्तान पर हमला किया तो रफी चौदह हजार फुट की ऊंचाई स्थित सांगला गए थे और देशभक्ति के गीत गाकर सैनिकों का हौसला बढ़ाया था। 
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mohammad rafi
वहीं रफी के चाहने वालों का कहना है कि गायकी को उनकी देन इतिहास के पन्नों में दर्ज रहेगी। लोगों के दिलों में याद रहेगी, लेकिन इस महान नायक का सरकार सम्मान नहीं कर पा रही है। मोहम्मद रफी का नाता गुरुनगरी अमृतसर से है, लेकिन उनको शहर में कोई यादगार नहीं मिल सकी है। ऐसा ही कुछ शहीद उधम सिंह के साथ हुआ। दोनों नायकों को लोग जन्मतिथि और पुण्यतिथि पर याद कर लेते हैं और बाद में भूल जाते हैं। 
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mohammad rafi
ऊधम सिंह के नाम पर चौक बनाकर उनका बुत तो लगा दिया है, लेकिन उन्हें शहीद का दर्जा आज भी सरकारों ने नहीं दिया है। प्यार-मोहब्बत और भक्ति भाव से लबरेज दिलकश गीत गाने वाले मोहम्मद रफी से हर दिन मुलाकात होती है, किसी चौराहे पर चाय की दुकान पर तो कहीं टीवी पर। कहीं शादी के मौके पर तो कहीं मंदिर में। अपनी आवाज से आज भी रफी भले ही जिंदा हैं, लेकिन अमृतसर जिले में आज तक उनके नाम से कोई सरकारी संस्थान नहीं खोला गया है। 
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rafi
गांव में स्मारक तो है लेकिन उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं। उल्लेखनीय है कि पंजाब के कोटला सुल्तान सिंह गांव में  24 दिसंबर 1924 को हाजी अली मोहम्मद के परिवार में मोहम्मद रफी का जन्म हुआ था। हाजी अली मोहम्मद के छह बच्चों में से रफी दूसरे नंबर पर थे। उन्हें घर में फीको कहा जाता था। गली में फकीर को गाते सुनकर रफी ने गाना शुरू किया था। 31 जुलाई 1980 को रमजान के महीने से दुनिया से विदा हो गए थे। 
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