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छोड़िए दवाइयां, ये 4 योगासन और नुस्खे जड़ से मिटा देंगे अस्थमा
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 15 Jan 2018 07:56 PM IST
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दमा
- फोटो : getty images
क्या आपको पता है कि योगासन बीमारियों से लड़ने की शरीर की क्षमता बढ़ाने में मददगार होते हैं। जानिए चार आसन, जो अस्थमा को जड़ से मिटा देंगे।
अस्थमा
अस्थमा एक ऐसा रोग है, जिसे पूरी तरह से ठीक कर पाना बेहद कठिन है। यदि बीमारी के प्रति जागरूक रहे तो इसे आसानी से काबू किया जा सकता है। अस्थमा से न सिर्फ व्यस्क पीड़ित होते हैं, बल्कि बच्चों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें सबसे ज्यादा ध्यान मरीज को खुद रखना पड़ता है। उन्हें ही अच्छी तरह से पता रहता है कि किससे उन्हें एलर्जी और किससे नहीं।
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क्यों बढ़ता है खतरा
विशेषज्ञ बताते हैं कि इस सीजन में अस्थमा अटैक के तीन से चार गुना मरीज बढ़ते हैं, क्योंकि आसपास के इलाकों में गेहूं की कटाई होती है। इसका असर चंडीगढ़ में भी दिखता है। पीजीआई व चंडीगढ़ के क्लीनिक में इस सीजन में अचानक से अस्थमा पीड़ितों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में पीड़ितों को चाहिए कि वे ज्यादा न निकलें।
विशेषज्ञ बताते हैं कि इस सीजन में अस्थमा अटैक के तीन से चार गुना मरीज बढ़ते हैं, क्योंकि आसपास के इलाकों में गेहूं की कटाई होती है। इसका असर चंडीगढ़ में भी दिखता है। पीजीआई व चंडीगढ़ के क्लीनिक में इस सीजन में अचानक से अस्थमा पीड़ितों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में पीड़ितों को चाहिए कि वे ज्यादा न निकलें।
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अस्थमा का कारण
पशुओं की त्वचा, बाल व रोए। घास व पौधों के पराग व धूल के कणों से। सिगरेट के धुएं व वायु प्रदूषण से। ठंडी हवा या मौसमी बदलाव से। पेंट की गंध, परफ्यूम या रूम फ्रेशनर से। भावनात्मक मनोभाव (जैसे रोना या लगातार हंसना) और तनाव से। वंशानुगत कारण। गर्भावस्था में यदि महिला तंबाकू के धुएं के बीच में रहती है, तो उसके बच्चे को अस्थमा हो सकता है।
पशुओं की त्वचा, बाल व रोए। घास व पौधों के पराग व धूल के कणों से। सिगरेट के धुएं व वायु प्रदूषण से। ठंडी हवा या मौसमी बदलाव से। पेंट की गंध, परफ्यूम या रूम फ्रेशनर से। भावनात्मक मनोभाव (जैसे रोना या लगातार हंसना) और तनाव से। वंशानुगत कारण। गर्भावस्था में यदि महिला तंबाकू के धुएं के बीच में रहती है, तो उसके बच्चे को अस्थमा हो सकता है।
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- फोटो : डेमो
ये उठाएं कदम
मरीज को खुद का ध्यान रखने की बेहद जरूरत है। धूल मिट्टी से दूर रहे। घर पर ही रहें। पालतू जानवर से दूर रहे हैं। पालतू कुत्ते को हर हफ्ते नहलाएं। साफ-सफाई का काम न करें। इससे उड़ने वाली धूल परेशान कर सकती है। धूम्रपान बिलकुल न करें. अगर आपके घर में कोई करता है, तो उसे भी इससे दूर रहने के लिए कहें। डाक्टरी सलाह पर रोज व्यायाम करें। अपना इन्हेलर अपने पास रखें। डॉक्टर की सलाह लेने के बाद ही योग या एक्सरसाइज करना शुरू करें।
मरीज को खुद का ध्यान रखने की बेहद जरूरत है। धूल मिट्टी से दूर रहे। घर पर ही रहें। पालतू जानवर से दूर रहे हैं। पालतू कुत्ते को हर हफ्ते नहलाएं। साफ-सफाई का काम न करें। इससे उड़ने वाली धूल परेशान कर सकती है। धूम्रपान बिलकुल न करें. अगर आपके घर में कोई करता है, तो उसे भी इससे दूर रहने के लिए कहें। डाक्टरी सलाह पर रोज व्यायाम करें। अपना इन्हेलर अपने पास रखें। डॉक्टर की सलाह लेने के बाद ही योग या एक्सरसाइज करना शुरू करें।