पिछली बार हुई थोड़ी सी बारिश में ही शहर में हुए जलभराव से नगर निगम ने कोई सीख नहीं ली। फिर से कुछ मिनटों की बारिश ने नगर निगम की पोल खोल दी। जगह-जगह जलभराव ने साफ कर दिया कि कि सफाई के नाम पर महज दिखावा हुआ है। सड़कों के किनारे लगे कचरे के ढेर फिर से रोड गली की जालियों में फंस गए और लोगों को हर बार की तरह ही इस बार भी समस्या से जूझना पड़ा।
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शहर की सड़कें रहीं जलमग्न
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नगर निगम कमिश्नर केके यादव ने लगातार कर्मचारियों को बारिश से पहले शहर की सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने की हिदायत दे रहे थे ताकि लोगों को फिर से जलभराव की समस्या से न जूझना पड़े लेकिन कर्मचारियों ने महज खानापूर्ति करते हुए कुछ हिस्सों की ही सफाई की। इसके अलावा जहां कचरा साफ किया, वहीं पर ढेर लगा दिया और उठाया भी नहीं।
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कुछ देर की बारिश ने खड़ी की मुसीबत
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परिणाम यह निकला कि सफाई के बाद इकट्ठा कचरा सीवर की जालियों पर जाकर फंस गया। इससे जलभराव की स्थिति बन गई। हालांकि एक घंटे में ही सभी जगह से पानी निकल गया लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अभी थोड़ी सी बारिश में यह हाल है। पूरा मानसून बाकी है। ऐसे में शहर किस हाल में होगा अंदाजा लगाया जा सकता है।
पानी में तैरती नजर आ रहीं थीं गाड़ियां
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बस का यह हाल तो कार का क्या होगा
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सेक्टर 28, 29, 34, 27, 44, 45, 46, 43, 35 डी, सेक्टर 15 के अंडर ब्रिज, इंडस्ट्रियल एरिया फेज 1, मनीमाजरा, रामदरबार, पुलिस लाइन सहित कई अन्य क्षेत्रों में पानी भरने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सेक्टर 33 में प्रशासनिक अधिकारियों व कर्मचारियों के घरों में पानी भर गया। सेक्टर 44 में तो जलभराव के बाद ऐसा लग रहा था जैसे गाड़ियां पानी में तैर रही हैं।
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कुछ ऐसा रहा चंडीगढ़ का हाल
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लोगों का कहना था कि कई बार सफाई कर्मचारियों को कहा गया कि कचरा उठाकर ले जाएं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसका खामियाजा जलभराव के रूप में भुगतना पड़ रहा है। पंजाब यूनिवर्सिटी में पानी भरने से छात्रों सहित अन्य लोगों को काफी परेशानी हुई। कई स्टूडेंट की बाइक तो पानी में बंद हो गईं। वहीं कुछ तेजी से निकलने के चक्कर में गिर गए।