गुप्त नवरात्र में की गई साधना कभी निष्फल नहीं होती। ऐसे में अगर आप अपनी राशि के अनुसार शिव और पार्वती की पूजा करेंगे तो निश्चित ही शुभ फल मिलेगा।
गुप्त नवरात्र दस महाविद्याओं के होते हैं। यदि कोई इन महाविद्याओं के रूप में शक्ति की उपासना करे तो उसका जीवन धन-धान्य, राज्य सत्ता से भर जाता है। गुप्त नवरात्र में की गई मंत्र साधना कभी निष्फल नहीं जाती। इस बार गुप्त नवरात्र 12 जुलाई तक रहेगी। मानव के समस्त रोग-दोष व कष्टों के निवारण के लिए गुप्त नवरात्र से बढ़कर कोई साधना काल नहीं है।
श्री, वर्चस्व, आयु, आरोग्य और धन प्राप्ति के साथ ही शत्रु संहार के लिए गुप्त नवरात्र में अनेक प्रकार के अनुष्ठान और व्रत-उपवास के विधान शास्त्रों में मिलते हैं। यह कहना है श्री शंभू पंच अग्नि अखाड़ा के महंत संपूर्णानंद ब्रह्मचारी का। उन्होंने कहा कि शिव संहिता के अनुसार, ये नवरात्र भगवान शंकर और आदि शक्ति मां पार्वती की उपासना के लिए भी श्रेष्ठ हैं।
गुप्त नवरात्रों में लोग अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्तियों में वृद्धि करने के लिए अनेक प्रकार के उपवास, संयम, नियम, भजन, पूजन, योग साधना आदि करते हैं। महंत संपूर्णानंद ब्रह्मचारी ने कहा कि सभी नवरात्रों में माता के 51 पीठों पर भक्त विशेष रूप से दर्शन के लिए एकत्र होते हैं। माघ और आषाढ़ शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से नवमी तक की नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहते हैं।
प्रत्यक्ष फल देते हैं गुप्त नवरात्र
महंत संपूर्णानंद ब्रह्मचारी ने बताया कि गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं की साधना कर ऋषि विश्वामित्र अद्भुत शक्तियों के स्वामी बन गए थे। उनकी सिद्धियों की प्रबलता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने एक नई सृष्टि की रचना तक कर डाली थी। गुप्त नवरात्र के दौरान कई साधक महाविद्या (तंत्र साधना) के लिए मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा करते हैं।