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पाक में ऐसा ऐतिहासिक गुरुद्वारा, जिसे बना दिया पशुओं का बाड़ा

Mon, 24 Aug 2015 08:28 AM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, अमृतसर(पंजाब)
ब्यूरो/अमरउजाला, अमृतसर(पंजाब) Updated Mon, 24 Aug 2015 08:28 AM IST
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पाक में ऐसा ऐतिहासिक गुरुद्वारा, जिसे बना दिया पशुओं का बाड़ा

pitiable condition of  historical gurudwara of  minority sikh community in pakistan

पाकिस्तान में एक ऐतिहासिक गुरुद्वारे को पशुओं का बाड़ा बना दिया गया। देखिए इस गुरुद्वारे की बदहाली की तस्वीरें।

पाक में ऐसा ऐतिहासिक गुरुद्वारा, जिसे बना दिया पशुओं का बाड़ा

pitiable condition of  historical gurudwara of  minority sikh community in pakistan

यह ऐतिहासिक गुरुद्वारा पाकिस्तानी शहर कसूर की पत्तोकी तहसील के गांव फूलनगर में स्थित है। गुरुद्वारा भाई फेरू की इमारत के भीतर भाई जी की समाधि भी मौजूद है, लेकिन कब्जाधारी परिवार समाधि स्थल को पशुओं के बाड़े के तौर पर और सुखासन स्थान को तूड़ी (भूसा) रखने के लिए इस्तेमाल कर रहा है। इस भवन के बाहर ‘सुखासन स्थान श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी’ आज भी लिखा हुआ है। इसका खुलासा प्रसिद्ध इतिहासकार सुरिंदर कोछड़ ने किया है।

पाक में ऐसा ऐतिहासिक गुरुद्वारा, जिसे बना दिया पशुओं का बाड़ा

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इतिहासकार ने बताया कि गुरु हरि राय साहिब ने भाई फेरू को नक्के क्षेत्र का मसंद (गुरुद्वारे का प्रबंधक) नियुक्त किया था। जब बाकी मसंदों ने बुरे काम शुरू कर दिए तो गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा सभी मसंदों को दाढ़ी से पकड़कर हुजूरी में लाने का हुकम हुआ। भाई फेरू अपनी दाढ़ी खुद अपने हाथों से पकड़कर गुरु साहिब के सामने पेश हो गए। इस पर गुरु साहिब ने उन्हें ‘सच्ची दाढ़ी’ और ‘संगत साहिब’ का खिताब बख्शा।

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कोछड़ ने बताया कि पाक में भाई फेरू, जिला मंडी बहाउद्दीन के गांव मंगट में गुरु अर्जन साहिब से संबधित गुरुद्वारा भाई बन्नू, गांव जैसुख में श्री गुर नानक साहिब से संबंधित यादगार गुरुद्वारा केर सिंह, गुरुद्वारा अजीतसर, दरबार बाबा श्री चंद (उकाड़ा), गुरुद्वारा मामेसर, छोटा नानकियाना, गुरुद्वारा दफतुह, गुरुद्वारा थम्म साहिब (कसूर), गुरुद्वारा बाबा गुरुबख्श सिंह (नैनाकोट), गुरुद्वारा दमदमा साहिब (गुजरावाला), गुरुद्वारा टाहली साहिब और गुरुद्वारा रामपुरखुर्द में स्थानीय लोगों ने कब्जा कर पशुओं को बांधा हुआ है।

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कोछड़ ने कहा कि पाकिस्तान सरकार हमेशा कहती है कि उनके देश में जितने गुरुद्वारे हैं, उनकी पूरी संभाल की जा रही है लेकिन हकीकत कुछ और ही है। पाकिस्तान सरकार को सिखों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए पाकिस्तान में मौजूद सिख यादगारों की हो रही दुर्दशा की ओर भी गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

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