साढ़े 3 माह बाद परी को नसीब हुई मां की गोद, आखें छलकीं
पैदा होने के बाद ही बदले जाने के शक में ठुकरा दी गई 135 दिन की परी को आखिरकार 136वें दिन मां की गोद मिल गई तो नर्सों की आखें छलकीं। देखिए क्यों?
साढ़े 3 माह बाद परी को नसीब हुई मां की गोद, आखें छलकीं
पैदा होने के बाद ही बदले जाने के शक में ठुकरा दी गई 135 दिन की परी को लंबी जद्दोजहद के बाद आखिरकार 136वें दिन मां की गोद मिल गई। बच्चा बदलने का आरोप लगाने वाली रामनगर की कविता के डीएनए से परी का डीएनए मेल खा गया। वीरवार को प्रशासन और पुलिस ने डीएनए टेस्ट रिपोर्ट सार्वजनिक करने के साथ ही जरूरी कागजी औपचारिकताएं पूरी कर परी को उसकी मां कविता और पिता अमित को सौंप दिया।
साढ़े 3 माह बाद परी को नसीब हुई मां की गोद, आखें छलकीं
परिजनों को हर 15वें दिन बच्ची का सिविल अस्पताल में मेडिकल कराने की हिदायत दी गई है। प्रशासन और पुलिस ने वीरवार को सीएमओ कार्यालय में परी और रामनगर निवासी कविता के डीएनए की रिपोर्ट का खुलासा किया। रिपोर्ट सीएमओ डॉ. इंद्रजीत धनखड़ ने पढ़कर सुनाई। पुलिस की तरफ से खुद एसपी राहुल शर्मा और प्रशासन की तरफ से तहसीलदार हरिओम अत्री पहुंचे।
साढ़े 3 माह बाद परी को नसीब हुई मां की गोद, आखें छलकीं
एसपी ने कहा कि एक अक्तूबर को चंडीगढ़ स्थित लैब में कविता और परी का डीएनए टेस्ट कराया गया। बुधवार रात इसकी रिपोर्ट आ गई थी। परी के डीएनए कविता के साथ मिले हैं। बायोलॉजिकली बच्ची रामनगर निवासी अमित और कविता की ही है। लंबी कागजी कार्यवाही के बाद दोपहर डेढ़ बजे सिविल अस्पताल की इमरजेंसी के बाहर परी को उसके असल मां कविता व पिता अमित के हवाले कर दिया गया।
साढ़े 3 माह बाद परी को नसीब हुई मां की गोद, आखें छलकीं
परी के पिता अमित कुमार ने बताया कि उनकी दो बेटियां पहले से हैं। तीसरी बेटी परी को भी वह बराबर का प्यार देंगे। उसे किसी तरह की कमी नहीं आने देंगे। परी के दादा राजबीर ने कहा कि उन्होंने बच्ची को अपनाने से कभी इनकार नहीं किया। वह तो खुद ही ये बात कह रहे थे कि ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने बच्ची पैदा होने की बताई लेकिन दूध पिलाने के लिए हर बार लड़का दिया। इससे उनको शक हुआ और बच्ची का डीएनए टेस्ट कराने की मांग की।