शक्ति की धरती हरियाणा: नवरात्र पर मां के दरबार सजेंगे, जानिए दर्शन से आरती तक का समय
माता शीतला को रोगों से रक्षा करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक परंपराओं में मंदिर को गुरु द्रोणाचार्य की पत्नी कृपी से भी जोड़ा जाता है। वर्तमान मंदिर के निर्माण को लेकर 18वीं शताब्दी में भरतपुर के राजा जवाहर सिंह से संबंधित मान्यता भी प्रचलित है।
विस्तार
हरियाणा को देवी मंदिरों और धार्मिक आस्था की धरती के रूप में विशेष पहचान मिली है। यहां कुरुक्षेत्र स्थित मां भद्रकाली मंदिर जैसे प्राचीन और महत्वपूर्ण शक्तिपीठ श्रद्धालुओं की गहरी आस्था के केंद्र हैं। नवरात्र के अवसर पर इन मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है और विशेष पूजा-अर्चना, भोग व आरती का आयोजन होता है। इस बार भी प्रदेश के कई देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं के लिए खास व्यवस्थाएं की गई हैं।
देवी कूप, श्री भद्रकाली मंदिर, कुरुक्षेत्र
यह मंदिर माता भद्रकाली को समर्पित हरियाणा का एकमात्र प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। मान्यता है कि यहां माता सती का दाहिना घुटना गिरा था और पांडवों ने भी यहां पूजा की थी। मंदिर की प्राचीनता महाभारत और शक्तिपीठ से जुड़ी धार्मिक परंपराओं में वर्णित है।
इस बार की विशेष व्यवस्थाएं
माता के भवन की सजावट के लिए थाईलैंड, मलेशिया व सिंगापुर से आर्किड, मॉरिशस से एन्यूरियम, कोलंबिया से गुलदाउदी के फूलों के अलावा दिल्ली, बेंगलुरु, पुणे व कोलकाता से विशेष फूल मंगवाए गए हैं। अन्न का भंडारा 26 अक्टूबर तक चलेगा, जबकि व्रत का भंडारा नवरात्र की सप्तमी तक चलेगा। नवरात्र उत्सव की शुरुआत एक भव्य शोभा यात्रा से होगी, जिसमें मां की ज्योत के साथ 5100 कलशधारी महिलाएं, 52 शक्तिपीठ के त्रिशूल, 1100 लाल ध्वज, चार बैंड, 31 रथ और सात पैदल झांकियां आकर्षण का केंद्र होंगी।
दर्शन और आरती का समय
- कपाट खुलने का समय: सुबह 5:15 बजे से रात 10 बजे तक।
- भोग: सुबह व शाम आरती के बाद।
- आरती: मंगल आरती सुबह छह बजे, संध्या आरती छह बजे।
माता भीमेश्वरी देवी मंदिर, बेरी
झज्जर जिले के बेरी में स्थित श्री भीमेश्वरी देवी मंदिर, माता दुर्गा के प्राचीन मंदिरों में से एक है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, महाभारत काल में पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान माता की पूजा की थी और भीम माता की मूर्ति को हिडिंबा पर्वत से बेरी लेकर आए थे, जिसके कारण इनका नाम भीमेश्वरी देवी पड़ा। मंदिर की स्थापना के निश्चित वर्ष और संस्थापक के संबंध में स्पष्ट ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन स्थानीय मंदिर परंपरा इसे महाभारतकालीन मंदिर बताती है।
इस बार की विशेष व्यवस्थाएं
मंदिर परिसर के दोनों मंदिरों को आकर्षक लाइटों और रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया है। बाहरी मंदिर के भवन को गाजीपुर, दिल्ली से आए कारीगरों द्वारा प्राचीन राजमहल जैसा भव्य स्वरूप दिया गया है, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। आज से मां बेरी की प्रतिदिन निकलने वाली नित्य यात्रा को गाजे-बाजे के साथ उत्सव के रूप में निकाला जाएगा।
दर्शन और आरती का समय
- कपाट खुलने का समय: बाहर वाले मंदिर में सुबह 4:30 बजे माता आती हैं, जिसके बाद पुजारी मंत्रोच्चार के साथ स्नान करते हैं। 5:15 बजे कपाट खोल दिए जाते हैं।
- भोग: दोपहर बाद जब माता अंदर वाले भवन में आती हैं, उसके बाद भोग लगाया जाता है।
- आरती: मंगला आरती सुबह 4:30 बजे, संध्या आरती शाम 6:30 बजे।
जयंती देवी मंदिर, जींद
माता जयंती को विजय की देवी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पांडवों ने कौरवों के विरुद्ध युद्ध में विजय की कामना से यहां पूजा की थी और मंदिर के आसपास बसी बस्ती का नाम जयंतीपुरी पड़ा, जो आगे चलकर जींद कहलाया। लोक-परंपरा मंदिर का निर्माण महाभारत काल में पांडवों द्वारा किए जाने से जोड़ती है, लेकिन मंदिर की वास्तविक स्थापना-तिथि का निश्चित ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
इस बार की विशेष व्यवस्थाएं
मान्यता है कि मां को नवरात्र में मंदिर में किसी न किसी रूप व साधन पर लाया जाता है। मंदिर के पुजारियों के अनुसार, इस बार नवरात्र के दौरान मां को हाथी पर सवार होकर लाया जाएगा। मंदिर को नवरात्र के लिए विशेष तौर पर सजाया गया है।
दर्शन और आरती का समय
- कपाट खुलने का समय: सुबह 4 बजे।
- भोग: सुबह 7 बजे।
- आरती: मंगला आरती सुबह पांच बजे, संध्या आरती शाम साढ़े 6 बजे।
सिद्ध श्री देवी मंदिर, पानीपत
यह मंदिर लगभग 250 वर्ष पुराना बताया जाता है। इसका निर्माण 1761 में पानीपत के तीसरे युद्ध के दौरान हुआ था, हालांकि मंदिर प्रबंधन देख रही अग्रवाल वैश्य पंचायत के प्रधान काकू बंसल इसकी स्थापना और भी पुरानी बताते हैं। सदाशिवराव भाऊ को देवी की यह मूर्ति तालाब के किनारे मिली थी।
इस बार की विशेष व्यवस्थाएं
लगभग 15 हजार मीटर रंग-बिरंगे कपड़े से मंदिर को सजाया गया है। सजावट में कोलकाता और दिल्ली के साथ विदेशी फूलों का इस्तेमाल किया गया है। मंदिर में हर रोज दो से ढाई लाख रुपये के फूल लगाए जाएंगे।
दर्शन और आरती का समय
- कपाट खुलने का समय: सुबह चार बजे।
- भोग: सुबह साढ़े तीन बजे।
- आरती: सुबह 5:00 बजे, सायंकाल 6:00 बजे और शयन आरती रात 9:15 बजे।
देवी भवन मंदिर, हिसार
यह हिसार का प्रमुख देवी मंदिर है, जहां स्थानीय श्रद्धालु नियमित रूप से पूजा करते हैं। नवरात्रि के अवसर पर यहां विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। मंदिर करीब 250 वर्ष पुराना बताया जाता है।
इस बार की विशेष व्यवस्थाएं
इस बार नवरात्र महोत्सव के लिए चार शक्तिपीठों से महामाई की दिव्य ज्योत लाई गई हैं। प्रतिदिन इन ज्योत की विशेष पूजा की जाएगी। मंदिर को रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। मां नैना देवी, मां ज्वाला जी, मां वैष्णो देवी और मां बनभौरी से लाई गई विशेष ज्योत अखंड रूप से प्रज्ज्वलित रहेंगी।
दर्शन और आरती का समय
- कपाट खुलने का समय: सुबह 5 बजे से दोपहर 12 बजे तक, और शाम 3 बजे।
- भोग: सुबह 6:05 बजे, शाम 6:25 बजे।
- आरती: महामाई ज्योत आरती: सुबह 5:10 बजे, शाम 6 बजे। मां काली की आरती: सुबह 5:30 बजे, शाम 6:20 बजे।
शीतला माता मंदिर, गुरुग्राम
माता शीतला को रोगों से रक्षा करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक परंपराओं में मंदिर को गुरु द्रोणाचार्य की पत्नी कृपी से भी जोड़ा जाता है। वर्तमान मंदिर के निर्माण को लेकर 18वीं शताब्दी में भरतपुर के राजा जवाहर सिंह से संबंधित मान्यता भी प्रचलित है।
इस बार की विशेष व्यवस्थाएं
नवरात्र पर माता के मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया है। मंदिर में 11 से 20 अक्तूबर तक नवरात्र मेले का आयोजन होगा। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
दर्शन और आरती का समय:
- कपाट खुलने का समय: नवरात्र के दौरान मंदिर दर्शन के लिए 24 घंटे खुला रहेगा।
- भोग: सुबह 11 बजे।
- आरती: सुबह 5:00 और शाम 6:30 बजे।