मां और बेटी एक साथ दुल्हन बनीं और दोनों ने ही 16 श्रृंगार किया। दोनों ने सज धजकर खूब डांस भी किया, लेकिन मौका शादी का नहीं था। देखिए तस्वीरें।
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मां और बेटी ने अपनाया वैराग्य जीवन
हरियाणा के पानीपत में यह अनोखा नजारा सड़क पर देखने को मिला। लोगों ने पूछा तो मामला शादी का नहीं, बल्कि कुछ और निकला। दरअसल, दोनों मां-बेटी गृहस्थ जीवन का त्याग कर वैरागन जीवन अपनाने जा रही थीं। गांधी मंडी स्थित जैन स्थान में एक महिला व तीन बेटियों ने मंगलवार को आखिरी बार साजो-शृंगार कर मेहंदी रस्म पूरी की। महिलाओं ने गीत गाए और फिर दुल्हन की तरह सजकर डांस किया।
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मां और बेटी ने अपनाया वैराग्य जीवन
एसएस जैन सभा की ओर से सामूहिक जैन भागवती दीक्षा महोत्सव का आयोजन किया गया। इसमें दोनों मां-बेटी ने सफेद वस्त्र धारण कर सांसारिक सुखों का त्याग कर साध्वी का जीवन अपना लिया। उनके साथ दो और महिलाओं ने वैरागय जीवन अपनाया। मेहंदी रस्म के दौरान चारों ने नृत्य किया और बाद में यहां पहुंचे सभी जैन मुनियों से आशीर्वाद लिया।
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मां और बेटी ने अपनाया वैराग्य जीवन
मंगलवार की दोपहर को सभी महिलाओं को परिजनों ने दुल्हन तरह सजाया गया। शहर के कई मार्गों से शोभा यात्रा निकाली गई सभी ने स्वागत किया। सभी ने जमकर डांस भी किया। साध्वी बन रही महिलाओं ने हाथों में मेंहदी भी लगाई। परिजनों का कहना था कि हमारे परिवार के लिए यह बहुत खुशी का दिन है हम सब बेदह खुश हैं। इसलिए वे इसे पूरी तरह सेलीब्रेट करना चाहते हैं और सभी इच्छाएं पूरी की गई हैं, जो बाकी रह गई थीं।
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मां और बेटी ने अपनाया वैराग्य जीवन
जैन भागवती दीक्षा महोत्सव में गृह जीवन छोड़ साधु जीवन में प्रवेश करने जा रही वैरागन महिलाओं ने नाम हैं- राजरानी चहल, पूनम जैन, एकता चहल व कोमल जैन। इनको गांधी मंडी में जैन समाज के लोगों के घर सुबह व दोपहर को बान बैठाया गया। इसके बाद चारों वैरागन ढोल पर नाचते हुए मेहंदी महोत्सव में पहुंची। सभा में वैरागनों को प्लास्टिक गुड़िया दी गई और नोटों की माला पहनाकर शादी जैसी रस्म पूरी की गई।