आजादी के 70 साल बाद भी यहां एंबुलेंस नहीं पहुंची है, अस्पताल तक पहुंचने का कोई विकल्प नहीं है। इसलिए लोग इलाज से ज्यादा दुआओं पर विश्वास करते हैं।
देश की आजादी के 70 साल बाद भी हरियाणा के पंचकूला जिले के पिंजौर ब्लॉक में एक ऐसा गांव है, जहां अब तक पक्की सड़कें नहीं हैं। गांव के 80 वर्षीय बुजुर्ग जगत राम का कहना है कि रास्ते के साथ बच्चों के शादी के विकल्प भी सीमित हो गए हैं। गांव में करीब 30 युवा शादी के लायक हैं, लेकिन पक्की सड़क न होने के कारण कोई भी अपनी बेटी इस गांव में ब्याहने को तैयार नहीं है।
इस गांव में आज तक एक भी एंबुलेंस नहीं गई। यहां के लोगों ने कभी गांव में किसी प्रशासनिक अधिकारी और राजनेता को नहीं देखा। बड़ी बात है कि हरियाणा का ऐसा जिला जहां से शिक्षा के क्षेत्र में देश के टॉपर निकल रहे हैं, वहीं जिले के पिंजौर ब्लॉक के ‘गवाही’ गांव में मोबाइल के टावर और बिजली की सुविधा तक नहीं है।
सोमवार को अमर उजाला ने दस किमी पैदल चलकर गांव में सुविधाएं जांची तो कई हैरान करने वाली बातें सामने आईं। गांव की ओर जाते वक्त पाया कि एक बीमार 80 वर्षीय बुजुर्ग को चारपाई पर लादकर लोग इलाज के लिए अस्पताल ले जा रहे थे। बुजुर्ग की हालत खराब थी। लेकिन अस्पताल जाने के लिए गांव के लोगों के पास चारपाई के अलावा कोई विकल्प नहीं था।
यहां एंबुलेंस आने से कतराती है। क्योंकि ऊबड़-खाबड़ कच्ची सड़क पर हादसे का भय रहता है। वह कोई दूसरा वाहन भी नहीं मंगा सकते, क्योंकि फोन करने के लिए मोबाइल नेटवर्क भी नहीं है। कॉलिंग के लिए लोगों को घर से करीब पांच से छह किमी दूर जाना पड़ता है। बीमारी की हालत में शहर तक सूचना देना भी मुश्किल होता है। जो कच्ची सड़क है, वह भी गांव के लोगों ने खुद रुपये इकट्ठे करके बनवाई है।