पासपोर्ट बनवाने की सोच रहे हैं तो जान लीजिए कि अब इस डोक्यूमेंट की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके अलावा कई नियमों में बदलाव किए गए हैं, देखिए।
पासपोर्ट बनवाने के लिए सरकार की ओर से बर्थ सर्टिफिकेट की अनिवार्यता समाप्त करने के साथ ही एक बड़ा कदम उठाया गया है। इसके तहत साधु-संन्यासी अब माता-पिता के नाम की जगह अपने अध्यात्मिक गुरु का नाम भी लिख सकेंगे। हालांकि इसके लिए उन्हें चुनाव पहचान पत्र, पैन कार्ड और आधार कार्ड में से कम से कम एक दस्तावेज देना होगा।
इसके अलावा सरकार ने कुछ अन्य बदलाव भी किए हैं। इनमें सरकारी कर्मचारियों को अपने विभाग, मंत्रालय, विभाग के मुखिया से पहचान प्रमाण पत्र, नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं होगी। अब उन्हें केवल एक सेल्फ डिक्लरेशन देना होगा। इसमें लिखना होगा कि उन्होंने एक ऑर्डिनरी पासपोर्ट के लिए अप्लाई करने से पहले अपने इम्प्लॉयर को इसकी सूचना दे दी है।
वहीं पासपोर्ट आवेदन के वक्त डेट ऑफ बर्थ के सबूत के तौर पर ट्रांसफर/स्कूल लीविंग/दसवीं का सर्टिफिकेट, पैन कार्ड और आधार कार्ड/ई-आधार में से कोई एक दस्तावेज देना होगा। अब लोगों को किसी भी दस्तावेज को नोटरी या न्यायिक मजिस्ट्रेट से प्रमाणित शपथ पत्र के रूप में देने की जरूरत नहीं होगी। केवल सादे कागज पर अनुबंध प्रिंट करके देने से भी काम चल जाएगा।
पासपोर्ट के लिए एप्लिकेशन में लोगों को माता और पिता दोनों में से किसी एक का नाम लिखना होगा। वहीं शादीशुदा लोगों को मैरिज सर्टिफिकेट या अनुबंध नहीं देना होगा। इसके अलावा तलाकशुदा लोगों को अपने जीवनसाथी का नाम देना जरूरी नहीं है।