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एक्सक्लूसिवः एक गांव ऐसा जहां मक्खियों की वजह से घर छोड़ रहे हैं लोग

Fri, 17 Jun 2016 12:14 PM IST
सोमदत्त/अमर उजाला, करनाल(हरियाणा)
सोमदत्त/अमर उजाला, करनाल(हरियाणा) Updated Fri, 17 Jun 2016 12:14 PM IST
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no marriages in karnal village due to terror of house fly in summer season
करनाल के गांव में मक्खियों का आतंक - फोटो : अमर उजाला
कैराना में दबंगों से परेशान लोगों के पलायन का शोर पूरे देश में है लेकिन यहां एक गांव ऐसा भी है, जहां मक्खियों की दबंगई से आजिज आकर लोग घर छोड़ने को मजबूर हैं। देखिए, ये रिपोर्ट।
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करनाल के गांव में मक्खियों का आतंक - फोटो : अमर उजाला
ये गांव है हरियाणा के करनाल जिले का गांव है रसूलपुर कलां। गांव के बाशिंदे पिछले कई सालों से मक्खियों से इस कदर तंग है कि न तो खा सकते हैं और न पी सकते हैं। लोग इस गांव में शादी तक करने से कतराने लगे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि वे शुक्रवार को सीएम कैंप ऑफिस पर डेरा डालेंगे और वहां से तभी हटेंगे, जब उनके गांव से मक्खियां खत्म हो जाएंगी।
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करनाल के गांव में मक्खियों का आतंक - फोटो : अमर उजाला
जिला मुख्यालय से 12 किलोमीटर दूर स्थित रसूलपुर कलां गांव की पहचान मक्खियों से होती है। तीन हजार की आबादी वाले गांव में करीब 1200 वोटर हैं। बुधवार को अमर उजाला की टीम हालात जानने गांव पहुंची तो ऐसा मंजर देखने को मिला जो किसी भी स्वस्थ व्यक्ति को बीमार कर दे। यहां हर तरफ मक्खियां ही मक्खियां दिखती हैं। किसी जगह पर एक मिनट सुकून से बैठ नहीं सकते। हर वस्तु पर मक्खियां भिनभिनाती नजर आती हैं। ऐसी घिन कि पानी का एक घूंट पीने में भी संकोच होने लगता है। खाने के साथ न जाने बच्चे कितनी मक्खियां खा जाते हैं।
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करनाल के गांव में मक्खियों का आतंक - फोटो : अमर उजाला
गांव के बुजुर्ग परीधा सिंह कहते हैं, ‘मक्खियों ने जीना मुहाल कर दिया है। अब इस तरह और नहीं रहा जाता। मक्खियों की वजह से गांव में शादी समारोह या रस्म क्रिया करने में भी लोग परहेज करते हैं। कौन अपने घरों और जमीन को छोड़ना चाहता है, पर बच्चों को बचाना है तो गांव छोड़ना ही पड़ेगा। दर्जनभर परिवार तो गांव छोड़ चुके हैं, अब पूरा गांव ही पलायन की तैयारी में है। हमारे पास नहर में कूदने के सिवाय कोई चारा नहीं बचा है। फैसला प्रशासन के हाथ में है।
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करनाल के गांव में मक्खियों का आतंक - फोटो : अमर उजाला
परीधा सिंह के पास बैठे इकबाल और जरनैल सिंह बोले, ये भी कोई जीना है, बस जी रहे हैं जैसे तैसे। हमें अपनी फिक्र नहीं है, चिंता है तो बच्चों की। दरअसल गांव के पास ही तीन पोल्ट्री फार्म और एक हैचरी है। ग्रामीणों का आरोप है कि पोल्ट्री फार्म संचालक नियम और कायदों का पालन नहीं करते हैं और मुर्गियों के फीड में मिलाई जाने वाली दवाई नहीं मिलाते। इस कारण मक्खियां पैदा होती हैं। एक मक्खी दिन में छह बाद अंडे देती है और एक बार में 150 अंडे देती है, इसलिए पिछले तीन साल में गांव में मक्खियों की भरमार हो गई है।
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