वीरवार को हरियाणा में पूरे दिन चीख-पुकार या फिर एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियों के सायरन सुनाई दे रहे थे। ये सबकुछ हुआ...
वीरवार को पूरे दिन हरियाणा के अलग-अलग हिस्सों से भूकंप के झटकों की खबरें आती रही। दरअसल, यह मॉक ड्रिल थी और पूरे प्रदेश में एक साथ की गई। हर जिले में हुई भूकंप की मेगा मॉक ड्रिल में 257 मौतें और 1717 घायल लोगों की संख्या दर्ज की गई।
यह आंकड़ा एक काल्पनिक आपदा का था, लेकिन इन आंकड़ों को मूल्यांकन बहुत ही जमीनी स्तर पर किया गया। इन आंकड़ों के मूल्यांकन की विधि नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथारिटी द्वारा तैयार की गई थी। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर ये भी समीक्षा की गई कि किस जिले में मॉक ड्रिल बेहद सफल रही और किसी जिले में ज्यादा सुधार की जरूरत है।
जहां जानी नुकसान कम हुआ, वहां अभियान सफल रहा और जहां नुकसान ज्यादा हुआ, वहां फोकस करने की जरूरत है। इस आंकड़े के मुताबिक इस काल्पनिक भूकंप के दौरान होने वाले नुकसान में सबसे ज्यादा 42 मौतें रोहतक जिले में हुई और सबसे ज्यादा 186 लोग यमुनानगर में घायल हुए।
इस विधि से नुकसान का मूल्यांकन
जिलों में जिन भवनों को मॉक ड्रिल का हिस्सा बनाया गया। उन्हें भूकंप के दौरान मानवरहित होने का निर्धारित समय तय किया गया था। जो लोग समय खत्म होते-होते इन भवनों से लगभग निकल गए उन्हे घायल मान लिया गया और जो लोग भवनों में ही फंसे रह गए उन्हें मृत समझा गया। अब ये लोग किस वजह से भवनों से नहीं निकल पाए, मंथन इस पर होगा।