देशभर में किसानों की हालत बद से बद्तर हो गई है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि किसान जिस खेत में अनाज बोते थे अब वहीं फंदा लगाकर जान दे रहे हैं।
महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में किसानों के ऋण मुक्ति आंदोलन का प्रभाव अब हरियाणा और पंजाब पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है। पंजाब में पिछले साल 6,932 किसानों ने खुदकुशी की तो पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार बनने के बाद से लगातार खुदकुशियां हो रही हैं।
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जसपाल सिंह था साढ़े 17 लाख का कजर्दार
ताजा मामला वीरवार का है, जहां फतेहगढ़ साहिब के दो किसानों ने कर्ज के बोझ के कारण अपनी जान दे दी। दोनों किसान अलग-अलग गांवों से हैं। मृतक किसानों की पहचान लखवीर सिंह निवासी डेरा मीर मीरा और जसपाल सिंह (55) निवासी गांव लोहारी कलां बस्सी पठाना के तौर पर हुई है। लखवीर सिंह ने अपने ही खेतों में लगी मोटर के पास लगे पेड़ पर बुधवार रात को फंदा लगा लिया जबकि जसपाल सिंह ने 2 जून की बाद दोपहर सरहिंद नहर में कूदकर आत्महत्या कर ली।
आर्थिक संकट के कारण सबसे अधिक खुदकुशियां पंजाब के मालवा क्षेत्र के तहत पड़ते भटिंडा, मानसा, मोगा, बरनाला, मुक्तसर, अबोहर, फाजिल्का, लुधियाना आदि शहरों/गांवों के किसानों द्वारा की गई है।
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किसान आत्महत्या
- फोटो : ANI
यह दौर लगातार जारी है। भटिंडा व संगरूर जिलों में नशे के आदी होने के कारण 663 जबकि नशा रहित 1094 किसानों ने वित्तीय संकट में फंस जाने पर खुदकुशी करने जैसा सख्त कदम उठाया।