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#VoteKaro: हरियाणा में 10 सीटों पर लोकसभा चुनाव जीतने की 'जंग', जानिए और चुनिए अपना सांसद
Sat, 11 May 2019 11:16 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 11 May 2019 11:16 AM IST
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हरियाणा के दिग्गज राजनेता
- फोटो : फाइल फोटो
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लोकसभा चुनाव के छठे चरण में हरियाणा की 10 सीटों पर 12 मई को मतदान होगा। इसके लिए तमाम राजनीतिक दलों ने खूब पसीना बहाया है। मनोहर लाल, भूपेंद्र हुड्डा, चौटाला परिवार की साख प्रमुख रूप से दांव पर लगी है। ऐसे में अपने प्रत्याशी के जानिए, परखिए और फिर वोट कीजिए।
रतन लाल कटारिया
अंबाला: भाजपा -कांग्रेस में सीधा मुकाबला
रतन लाल कटारिया (भाजपा) मोदी मैजिक को भुना रहे हैं। दो बार के सांसद हैं। नाराज मंत्री अनिल विज भी समर्थन में जुट गए हैं, कार्यकर्ता भी मोदी के नाम पर मैदान में हैं। मतदाताओं से दूरी की वजह से कई जगह इनका विरोध हो रहा है। पिछले वादों पर भी जनता हिसाब मांग रही है।
कुमारी सैलजा (कांग्रेस) दो बार की सांसद हैं। हाईकमान में अच्छी पकड़ रखती हैं। पुराने कामों के बूते वोट मांग रहीं हैं। सभी को एकजुट कर साथ लेकर चल रहीं हैं। मोदी फैक्टर की वजह से दिक्कत आ रही। क्षेत्र का वाल्मीकि वोटर नाराज है। बीता लोकसभा चुनाव न लड़ने की भी मार पड़ रही है।
रामपाल वाल्मीकि (इनेलो) वाल्मीकि समाज से प्रत्याशी हैं। वाल्मीकि वोटर दो लाख से ज्यादा हैं। अन्य अनुसूचित जाति में भी ठीक प्रभाव रखते हैं। लोकसभा चुनाव लड़ने का अनुभव नहीं है। यमुनानगर में डिप्टी मेयर थे, इस दौरान एक विवाद में फंसे थे।
विस क्षेत्र : अंबाला कैंट, अंबाला सिटी, नारायणगढ़, मुलाना, कालका, पंचकूला, जगाधरी, यमुनानगर, सढौरा।
ये भी हैं मैदान में-- पृथ्वी सिंह (आप-जजपा), नरेश सारन (बसपा-लोसुपा)
रतन लाल कटारिया (भाजपा) मोदी मैजिक को भुना रहे हैं। दो बार के सांसद हैं। नाराज मंत्री अनिल विज भी समर्थन में जुट गए हैं, कार्यकर्ता भी मोदी के नाम पर मैदान में हैं। मतदाताओं से दूरी की वजह से कई जगह इनका विरोध हो रहा है। पिछले वादों पर भी जनता हिसाब मांग रही है।
कुमारी सैलजा (कांग्रेस) दो बार की सांसद हैं। हाईकमान में अच्छी पकड़ रखती हैं। पुराने कामों के बूते वोट मांग रहीं हैं। सभी को एकजुट कर साथ लेकर चल रहीं हैं। मोदी फैक्टर की वजह से दिक्कत आ रही। क्षेत्र का वाल्मीकि वोटर नाराज है। बीता लोकसभा चुनाव न लड़ने की भी मार पड़ रही है।
रामपाल वाल्मीकि (इनेलो) वाल्मीकि समाज से प्रत्याशी हैं। वाल्मीकि वोटर दो लाख से ज्यादा हैं। अन्य अनुसूचित जाति में भी ठीक प्रभाव रखते हैं। लोकसभा चुनाव लड़ने का अनुभव नहीं है। यमुनानगर में डिप्टी मेयर थे, इस दौरान एक विवाद में फंसे थे।
विस क्षेत्र : अंबाला कैंट, अंबाला सिटी, नारायणगढ़, मुलाना, कालका, पंचकूला, जगाधरी, यमुनानगर, सढौरा।
ये भी हैं मैदान में-- पृथ्वी सिंह (आप-जजपा), नरेश सारन (बसपा-लोसुपा)
संजय भाटिया
करनालः भाजपा-कांग्रेस में सीधी टक्कर
संजय भाटिया (भाजपा) मुख्यमंत्री के गृह जिला से प्रत्याशी हैं। सभी नौ विधानसभा में भाजपा के विधायक हैं। करनाल के साथ-साथ पानीपत में भी इनकी अच्छी पकड़ है। लोकसभा का पहला चुनाव लड़ रहे हैं, इसलिए अनुभव की कमी है। भाजपा से पिछले सांसद साथ नहीं हैं। मतदाताओं में पिछले सांसद के प्रति नाराजगी है।
कुलदीप शर्मा (कांग्रेस) पिता पंडित चिरंजीलाल शर्मा का पुराना गढ़ है। पिता चार बार सांसद रह चुके हैं। सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी हैं और विधायक भी हैं। विरोधी बाहरी प्रत्याशी के मुद्दे को तूल दे रहे हैं, क्योंकि मूल निवासी सोनीपत के गन्नौर से हैं और वहीं से विधायक है। गुटबाजी से भी नुकसान होने की आशंका है।
धर्मबीर पाढ़ा (इनेलो) पार्टी के पुराने और कर्मठ कार्यकर्ता हैं। अभय चौटाला के करीबी और जाट चेहरा हैं। इलाके के जाट वोटरों का प्रभावित होना इनके पक्ष में है। n लोकसभा चुनाव लड़ने का अनुभव नहीं है। पार्टी टूट चुकी है और इनेलो का वोटबैंक जजपा में शिफ्ट हो गया है।
ये भी हैं मैदान में-- कृष्ण अग्रवाल (आप-जजपा), पंकज चौधरी (लोसुपा-बसपा)
विस क्षेत्र : करनाल, पानीपत शहरी, पानीपत ग्रामीण, समालखा, इसराना, असंध, घरौंडा, इंद्री, नीलोखेड़ी।
संजय भाटिया (भाजपा) मुख्यमंत्री के गृह जिला से प्रत्याशी हैं। सभी नौ विधानसभा में भाजपा के विधायक हैं। करनाल के साथ-साथ पानीपत में भी इनकी अच्छी पकड़ है। लोकसभा का पहला चुनाव लड़ रहे हैं, इसलिए अनुभव की कमी है। भाजपा से पिछले सांसद साथ नहीं हैं। मतदाताओं में पिछले सांसद के प्रति नाराजगी है।
कुलदीप शर्मा (कांग्रेस) पिता पंडित चिरंजीलाल शर्मा का पुराना गढ़ है। पिता चार बार सांसद रह चुके हैं। सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी हैं और विधायक भी हैं। विरोधी बाहरी प्रत्याशी के मुद्दे को तूल दे रहे हैं, क्योंकि मूल निवासी सोनीपत के गन्नौर से हैं और वहीं से विधायक है। गुटबाजी से भी नुकसान होने की आशंका है।
धर्मबीर पाढ़ा (इनेलो) पार्टी के पुराने और कर्मठ कार्यकर्ता हैं। अभय चौटाला के करीबी और जाट चेहरा हैं। इलाके के जाट वोटरों का प्रभावित होना इनके पक्ष में है। n लोकसभा चुनाव लड़ने का अनुभव नहीं है। पार्टी टूट चुकी है और इनेलो का वोटबैंक जजपा में शिफ्ट हो गया है।
ये भी हैं मैदान में-- कृष्ण अग्रवाल (आप-जजपा), पंकज चौधरी (लोसुपा-बसपा)
विस क्षेत्र : करनाल, पानीपत शहरी, पानीपत ग्रामीण, समालखा, इसराना, असंध, घरौंडा, इंद्री, नीलोखेड़ी।
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भूपेंद्र सिंह हुड्डा
सोनीपत: भाजपा व कांग्रेस में टक्कर
भूपेंद्र सिंह हुड्डा (भाजपा) दो बार के सीएम और चार बार सांसद रह चुके हैं। जनता में अच्छी पकड़ रखते हैं। नौ विधानसभा क्षेत्रों में पांच समर्थक विधायक होने का लाभ इन्हें मिल सकता है। जजपा व इनेलो प्रत्याशी के भी जाट होने से नुकसान की आशंका है। नई सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।
रमेश कौशिक (भाजपा) मौजूदा सांसद एवं गैर जाट चेहरा हैं और मोदी के नाम पर वोट मांग रहे हैं। सोनीपत व जींद में भाजपा विधायक होने का फायदा मिलेगा। सांसद बनने के बाद लोगों के बीच कम सक्रियता रही है। इसको लेकर कई जगह विरोध हो रहा है। समस्याओं का समाधान न होने से भी जनता नाराज है।
दिग्विजय चौटाला (जजपा) ताऊ देवीलाल के नाम का सहारा लेकर चुनाव लड़ रहे हैं। जाट युवा चेहरा है और भावनात्मक तौर पर वोट मांग रहे हैं। जींद उपचुनाव में अच्छे प्रदर्शन से लाभ की उम्मीद है।
विस क्षेत्र : सोनीपत, गोहाना, जींद, राई, बरोदा, खारखौदा, गन्नौर, जुलाना, सफीदों।
ये भी हैं मैदान में---सुरेंद्र छिक्कारा (इनेलो) व राजबाला (बसपा-लोसुपा)
भूपेंद्र सिंह हुड्डा (भाजपा) दो बार के सीएम और चार बार सांसद रह चुके हैं। जनता में अच्छी पकड़ रखते हैं। नौ विधानसभा क्षेत्रों में पांच समर्थक विधायक होने का लाभ इन्हें मिल सकता है। जजपा व इनेलो प्रत्याशी के भी जाट होने से नुकसान की आशंका है। नई सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।
रमेश कौशिक (भाजपा) मौजूदा सांसद एवं गैर जाट चेहरा हैं और मोदी के नाम पर वोट मांग रहे हैं। सोनीपत व जींद में भाजपा विधायक होने का फायदा मिलेगा। सांसद बनने के बाद लोगों के बीच कम सक्रियता रही है। इसको लेकर कई जगह विरोध हो रहा है। समस्याओं का समाधान न होने से भी जनता नाराज है।
दिग्विजय चौटाला (जजपा) ताऊ देवीलाल के नाम का सहारा लेकर चुनाव लड़ रहे हैं। जाट युवा चेहरा है और भावनात्मक तौर पर वोट मांग रहे हैं। जींद उपचुनाव में अच्छे प्रदर्शन से लाभ की उम्मीद है।
विस क्षेत्र : सोनीपत, गोहाना, जींद, राई, बरोदा, खारखौदा, गन्नौर, जुलाना, सफीदों।
ये भी हैं मैदान में---सुरेंद्र छिक्कारा (इनेलो) व राजबाला (बसपा-लोसुपा)
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राव इंद्रजीत सिंह
गुड़गांव: भाजपा व कांग्रेस में सीधी लड़ाई
राव इंद्रजीत सिंह (भाजपा) चार बार सांसद, चार बार विधायक एवं केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। अहीरवाल बेल्ट में पकड़ अच्छी रखते हैं। नौ में से छह विधायक भाजपा व एक निर्दलीय का समर्थन प्राप्त है। मेवात में अधिक पकड़ नहीं हैं। राजनीतिक कद ऊंचा होने के कारण जनता में कम सक्रियता रखते हैं।
कैप्टन अजय यादव (कांग्रेस) छह बार के विधायक व पूर्व मंत्री हैं और बड़े राजनीतिक घराने से ताल्लुक रखते हैं। मेवात में भी अच्छी पकड़ रखते हैं। पार्टी की अंर्तकलह का असर पड़ेगा। वहीं कैप्टन, हुड्डा के धुर विरोधी हैं। संगठन कमजोर होने से कांग्रेस घर-घर नहीं पहुंच पा रही है।
महमूद खान (जजपा-आप) मेवात से होने की वजह से अच्छे समर्थन की उम्मीद है। दिल्ली में आप सरकार व दुष्यंत की साफ छवि का लाभ इन्हें मिल सकता है। इनमें राजनीतिक अनुभव की कमी है। जनता में ज्यादा चर्चित चेहरा न होना भी एक कमी है।
विस क्षेत्र : बावल, रेवाड़ी, पटौदी, बादशाहपुर, गुरुग्राम, सोहाना, नूंह, फिरोजपुर झिरका, पुन्हाना।
ये भी हैं मैदान में---वीरेंद्र राणा (इनेलो) और रईस अहमद (बसपा-लोसुपा)
राव इंद्रजीत सिंह (भाजपा) चार बार सांसद, चार बार विधायक एवं केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। अहीरवाल बेल्ट में पकड़ अच्छी रखते हैं। नौ में से छह विधायक भाजपा व एक निर्दलीय का समर्थन प्राप्त है। मेवात में अधिक पकड़ नहीं हैं। राजनीतिक कद ऊंचा होने के कारण जनता में कम सक्रियता रखते हैं।
कैप्टन अजय यादव (कांग्रेस) छह बार के विधायक व पूर्व मंत्री हैं और बड़े राजनीतिक घराने से ताल्लुक रखते हैं। मेवात में भी अच्छी पकड़ रखते हैं। पार्टी की अंर्तकलह का असर पड़ेगा। वहीं कैप्टन, हुड्डा के धुर विरोधी हैं। संगठन कमजोर होने से कांग्रेस घर-घर नहीं पहुंच पा रही है।
महमूद खान (जजपा-आप) मेवात से होने की वजह से अच्छे समर्थन की उम्मीद है। दिल्ली में आप सरकार व दुष्यंत की साफ छवि का लाभ इन्हें मिल सकता है। इनमें राजनीतिक अनुभव की कमी है। जनता में ज्यादा चर्चित चेहरा न होना भी एक कमी है।
विस क्षेत्र : बावल, रेवाड़ी, पटौदी, बादशाहपुर, गुरुग्राम, सोहाना, नूंह, फिरोजपुर झिरका, पुन्हाना।
ये भी हैं मैदान में---वीरेंद्र राणा (इनेलो) और रईस अहमद (बसपा-लोसुपा)