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'कहते थे, मैं कफन साथ बांधकर चलता हूं', छत्रपति की पत्नी हुई भावुक, बोली- क्या कुछ नहीं सहा
Sat, 19 Jan 2019 09:08 AM IST
खुशबू गोयल
सनमीत थिंड, अमर उजाला, सिरसा(हरियाणा)
सनमीत थिंड, अमर उजाला, सिरसा(हरियाणा)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 19 Jan 2019 09:08 AM IST
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पत्रकार छत्रपति की पत्नी कुलवंत कौर
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जो दर्द मैंने और मेरे बच्चों ने झेला, मैं बता नहीं सकती। क्या कुछ नहीं सहा हमने, टूट जाती थी अंदर से। पत्रकार छत्रपति की पत्नी कुलवंत कौर ने सुनाई आपबीती, पढ़कर भावुक हो जाएंगे।
पत्रकार छत्रपति की पत्नी कुलवंत कौर
मेरे पति रामचंद्र छत्रपति जब डेरे के खिलाफ खबरें छाप रहे थे तो मेरे टोकने पर कहते थे कि मैं अपना कफन साथ बांधकर रखता हूं। पति की हत्या के बाद हमें हर दिन धमकी मिलती थी। जो पीड़ा मैंने और मेरे बच्चों ने सही, उसे भुला नहीं सकती, न ही शब्दों में बयां कर सकती हूं। पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में राम रहीम को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद छत्रपति की पत्नी कुलवंत कौर ने भावुक होकर मीडिया को आपबीती सुनाई।
अंशुल छत्रपति
कुलवंत कौर नम आंखों और रुंधे गले से कहती हैं कि इस लड़ाई में जितना हीरो मेरा बेटा अंशुल है उतने ही वो जज हैं, जिन्होंने राम रहीम समेत चारों को दोषी ठहराया है। मैं जज साहब का शुक्रिया अदा करती हूं, जिन्होंने फैसला सुनाया। वे हमारे लिए रोल मॉडल हैं, ऐसे जज सभी पीड़ितों को मिलें, तभी न्याय हो सकेंगे। फैसले से न्यायपालिका पर लोगों का विश्वास और बढ़ा है।
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पत्रकार छत्रपति
कुलवंत कौर ने बताया कि छत्रपति की हत्या के बाद रिश्तेदार और लोग भी साथ छोड़ गए थे। लोग कहते थे कि कुछ नहीं होना, डेरामुखी के पास नोटों की पेटियां हैं। यह सुनकर दिल टूट जाता था, लेकिन भगवार के घर में देर है, अंधेर नहीं। जज का फैसला सुनने के बाद कुलवंत कौर ने कहा कि जब छत्रपति राम रहीम के खिलाफ लिखते थे तो मैं उन्हें मना करती थी कि आप ये सब कुछ छोड़ दीजिए, लेकिन वे जिद पर अड़े थे।
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राम रहीम
कुलवंत कौर ने बताया कि जब पहली बार राम रहीम को सजा हुई तो मुझे महसूस हुआ कि वे सही काम करके गए थे। उस दिन मुझे वास्तव में संतुष्टि मिली। जिस वजह से उनकी जान गई, वह कुर्बानी व्यर्थ नहीं गई। पति की हत्या के बाद उन्होंने अपने बेटे और बेटियों की शादी की, लेकिन खुशी से नहीं। केवल सामाजिक दायित्व निभाने के लिए अपना फर्ज पूरा किया। घर की खुशियां तो छत्रपति के जाने के साथ ही चली गई थीं।