छठ पूजा को दुनिया का सबसे कठिन व्रत कहा जाता है। ये सच है, इसके कई कारण है। इस खबर में हम आपको उन सभी कारणों के बारे में बताएंगे।
छठ पूजा एक कठिन तपस्या की तरह है। यह व्रत किसी भी मायने में आसान नहीं होता। अगर करवाचौथ पर सुहागिनों को करीब 16 घंटे बिना पानी के रहना होता है तो छठ करने वाली महिलाएं लगातार 36 घंटे बिना पानी पिए रहती हैं उसमें भी सभी काम खुद ही करने पड़ते हैं।
चार दिनों के इस व्रत में लगातार उपवास करना होता है। सिर्फ भोजन ही नहीं, सुख-आराम के सभी साधनों का भी त्याग करना होता है। पर्व के लिए बनाए गए कमरे में व्रती फर्श पर एक कंबल या चादर के सहारे रात बिताती है। जिस जगह पर व्रति चार दिन रहती हैं वहां प्याज-लहसुन आदी चीजें भी निषेध होती हैं।
इस उत्सव में शामिल होने वाले लोग नए कपड़े पहनते हैं। पर व्रत करने वाले ऐसे कपड़े पहनते हैं, जिनमें किसी प्रकार की सिलाई नहीं की होती है। मान्यता है कि सिलाई के वक्त सूई में धागा डालते वक्त वो जूठे हो जाते हैं। चौंकिए मत, 36 घंटे के निर्जला व्रत में मिट्टी के चूल्हे में आम की लकड़ी को जला कर खाना पकाया जाता है। यहां बता दें कि वो आम की लकड़ी परिवार के ही किसी सदस्य द्वारा लाया गया होना चाहिए।
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छठ पूजा
- फोटो : amar ujala
डूबते सूरज को देखना भी अपशगुन माना जाता है लेकिन छठ पर्व में डूबते हुए सूरज की भी पूजा की जाती है। यह व्रत वैसे तो महिलाओं द्वारा किया जाता है लेकिन कुछ पुरुष भी यह व्रत रखते हैं। चौथा दिन महिलाओं के लिए कड़ी तपस्या का दिन होता है। 36 घंटों का निर्जला व्रत और फिर जमा देने वाले ठंडे पानी में सूर्य भगवान के निकलने का इंतजार। शायद इसीलिए छठ पूजा को दुनिया का सबसे कठिन व्रत कहा जाता है।