कृषि से जुड़े तीन कानूनों को रद्द कराने समेत मांगों को लेकर पंजाब से दिल्ली कूच के आह्वान के साथ आए किसानों में बुजुर्गों की संख्या भी अच्छी खासी है। जिंदगी के आखिरी पड़ाव में पहुंच चुके बुजुर्ग किसान अपने हौसले के सहारे हक के लिए लड़ने की बात कह रहे हैं। बुजुर्ग किसानों का कहना है कि भूख से मरने से बेहतर है, मांगें मनवाने के लिए गोलियां खाकर अपनी जान दे दी जाए। वह न्याय और हक की लड़ाई लड़ रहे हैं और जीतकर ही वापस जाएंगे।
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किसान आंदोलन।
- फोटो : अमर उजाला
सर्द मौसम में कुंडली बॉर्डर पर डटे बुजुर्ग किसानों का जज्बा देखते ही बनता है। उनका मानना है कि उनके बेटे जब अपना हक लेने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं तो वह कैसे पीछे रह सकते हैं। सरकार के तीनों कृषि कानून किसानों को बर्बाद करने के लिए बनाए हैं। वह उन्हें रद्द कराने के बाद ही लौटेंगे। किसानों को रोकने के लिए जगह-जगह बल प्रयोग किया गया। उन पर पानी फेंका गया और आंसू गैस छोड़ी गई।
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सिंघु बॉर्डर पर जुटे किसान।
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बड़े-बड़े पत्थर रख, सड़क खोदकर और मिट्टी डालकर उन्हें रोकने का प्रयास किया लेकिन नतीजा क्या हुआ। देश की माटी से जुड़े पूत इन बाधाओं से हारने वाले नहीं है। धरती पुत्रों पर पानी की बौछार करना और आंसू गैस के गोले छोड़ना अन्याय है। किसान देश का अन्नदाता, खुद भूखा रहकर दूसरों का पेट भरता है।
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बलविंद्र सिंह
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घर पर ही एक बात कहकर चला था कि किसान के विरोध में बने तीनों कानूनों को वापस लेने के बाद ही लौटूंगा। किसान को बर्बाद करने वाले तीनों कानून हर हाल में वापस लिए जाने चाहिए। हमारी एक ही मांग है कि कानून को वापस लेकर किसान को उसका हक दिया जाए। किसान पहले ही फसल का लागत मूल्य भी नहीं मिलने से परेशान है और ऐसे में यह तीन कानून तो उन्हें पूरी तरह बर्बाद कर सकते हैं। वे अपनी आवाज को अंजाम तक पहुंचने के लिए डटे हैं। इसके लिए चाहे एक महीना लगे या दो महीने, हम पीछे नहीं हटेंगे। - बलविंद्र सिंह, किसान, पंजाब
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सरदार महेंद्र सिंह
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किसान ही देश का भला करता है। ऐसे में उसके साथ अन्याय करना गलत है। मैं 78 साल हो चुका हूं और बीमार होने के बावजूद अपने किसान भाइयों की लड़ाई में उनके साथ खड़ा हूं। सरकार सोच रही है कि किसान पीछे हट जाएगा लेकिन किसान जायज हक लिए बिना पीछे नहीं जाएगा। किसान ने सदैव देश की सेवा की है और किसान की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। हक के लिए वह मरने को भी तैयार है। - सरदार महेंद्र सिंह, मोगा पंजाब।