हरियाणा की धरती वीरता के लिए जानी जाती है। देश की सेवा में इस प्रदेश का योगदान अतुल्यनीय है। आज बात करेंगे हरियाणा के ऐसे ही एक गांव की जहां देशभक्ति का जज्बा कूट-कूट कर भरा हुआ है। यह रेवाड़ी में अरावली पर्वत माला के बीच बसा ऐतिहासिक लुहाना गांव है। गांव के देशभक्ति के किस्से दूर-दराज तक फैले हैं।
हरियाणाः 600 फौजियों वाला गांव, आजाद हिंद फौज में थे 14 लाल, पढ़ें गौरवगाथा
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गुलामी से हिंदुस्तान को आजाद कराना हो या अब देश की सरहदों की रक्षा की बात यहां के युवाओं ने हमेशा कुर्बानियां दी हैं। आजादी की लड़ाई में जहां 14 लोगों ने भाग लिया। वहीं करीब 600 लोग सेना में भर्ती हुए। इनमें से कुछ सेवानिवृत्त हो चुके हैं, अधिकतर देश की रक्षा में लगे हुए हैं। गांव की पहाड़ियों में स्थित 200 वर्ष पुराना ठाकुर मंदिर लोगों की आस्था का प्रतीक है। पहाड़ पर ही एक पुराना खंडहर नुमा किला है।
मातृ शक्ति के हाथ गांव की बागड़ोर
करीब चार हजार की आबादी वाले गांव की बागड़ोर महिला सरपंच के हाथों में है। इसके अलावा 11 पंच, जिनमें 4 महिला पंच है। गांव में मिडिल स्कूल, उप स्वास्थ्य केन्द्र, शिव मंदिर, ठाकुर मंदिर, शिव मूर्ति, सभी गलियां टाइलयुक्त, 22 घंटे बिजली आपूर्ति हो रही है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव का नाम लुहाना इसलिए पड़ा कि यहां काला पत्थर निकलता था, जो लोहा जैसा लगता था।
तभी से इस गांव को लुहाना के नाम से जाना जाता है। काला पत्थर खान में बाबा सैजू का मंदिर भी निकला था। गांव की सुंदरता देखने लायक हैं। गांव में पानी के 2 पंचायती बोरवेल व 3 पब्लिक हेल्थ के बोरवेल हैं। गांव की फिरनी को चौड़ा करवाकर अन्य मार्गों से जोड़ा गया है। लुहाना से खालेटा गांव तक सड़क बनाई गई है। बुस्टिंग स्टेशन भी बनाया गया है।
14 वीरों ने आजादी की लड़ाई में लिया भाग
नेताजी सुभाषचन्द्र बोस द्वारा बनाई गई आजाद हिंद फौज में लुहाना के 14 युवाओं ने भाग लिया थी और आजादी की लड़ाई लड़ी थी। आजादी से पहले आजाद हिंद फौज के नेतृत्व में सिंगापुर में अंग्रेजों के साथ जो लड़ाई लड़ी गई थी, उस लड़ाई में लुहाना के सात वीर जवान प्रभुदयाल, श्रीराम, रामजीलाल, सूरजन सिंह, प्रभुदयालन, घीसाराम, परमानंद शहीद हो गए थे।