आइफा अवार्ड्स 2017 में 'उड़ता पंजाब' को कई नामी अवार्ड मिले, लेकिन जानते हैं कि कभी सेंसर बोर्ड को मूवी की कई बातों पर ऐतराज था और खूब विवाद भी हुआ था, जानिए।
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उड़ता पंजाब
- फोटो : डेमो फोटो
सेंसर बोर्ड ने फिल्म की शुरूआत में पंजाब के बोर्ड को हटाने को कहा था। इसके साथ ही फिल्मकारों से पंजाब, जालंधर, चंडीगढ़, अमृतसर, तरनतारन, जशनपुरा, अंबेसर, लुधियाना और मोगा नामों को फिल्म के बैकग्राउंड और डायलॉग से हटाने को कहा गया था। सेंसर के नियम कहते हैं कि फिल्में देश की नीतियों, किसी क्षेत्र/राज्य विशेष, धर्म, संप्रदाय और व्यक्ति को गलत ढंग से नहीं दिखा सकतीं।
सेंसर का कहना है कि फिल्म में पंजाब को गलत रोशनी में दिखाया गया है। उड़ता पंजाब में दिखाया गया है कि राज्य के 70 फीसदी लोग नशा करते हैं। फिल्म 95 फीसदी पंजाब में आधारित है और इसमें पंजाबी ही बोली गई है। फिल्म के कई संवादों और गानों में ड्रग्स का महिमामंडन है। शाहिद कपूर और अन्य ऐक्टरों को ड्रग्स का सेवन करते दिखाया गया है।
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उड़ता पंजाब
- फोटो : फाइल फोटो
शाहिद फिल्म में पॉप सिंगर बने है, जो अपने गानों में युवाओं को ड्रग्स लेने के लिए प्रेरित करते हैं। सेंसर की गाइडलाइंस किसी को ड्रग्स का सेवन करते दिखाने के विरुद्ध हैं। फिल्म के पहले गीत से चित्तावे और हरामी जैसे शब्द हटाने को कहा गया था। तो दूसरे गीत से 'tom di c*ck jevhe chitti chitti c*ck' और 'coke c*ck'हटाने को कहा गया था।
सेंसर बोर्ड ने इसके अलावा फिल्म में इलेक्शन, एमपी, पार्टी फ्रॉम पार्टी वर्कर, एमएलए, पंजाब, पार्लियामेंट जैसे शब्दों पर आपत्ति जतायी थी। फिल्म में एक नेता को चुनाव प्रचार के दौरान ड्रग्स बांटते दिखाया गया है। जबकि सभी राजनीतिक दल ड्रग्स की समस्या के विरुद्ध हैं। फिल्म के तीसरे गीत से वह दृश्य हटाने की बात कही गई थी, जिसमें एक सरदार अपने शरीर को खुजलाते दिखाया गया है।