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कोरोना वायरस के डर से भारत में चीन के ड्रैगन फ्रूट पर भी लगी ‘ब्रेक’, और खाने के फायदे अनेक
Thu, 20 Feb 2020 01:11 PM IST
खुशबू गोयल
अभिषेक वाजपेयी, चंडीगढ़
अभिषेक वाजपेयी, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 20 Feb 2020 01:11 PM IST
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ड्रैगन फ्रूट
- फोटो : फाइल फोटो
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कोरोना का असर देश के फल बाजार पर भी पड़ा है। वायरस के डर से चीन से मंगाए जाने वाले ड्रैगन फ्रूट (पिताया) पर फल व्यापारियों ने पाबंदी लगा दी है, लेकिन इसे खाने से फायदे बहुत होते हैं।
ड्रैगन फ्रूट
चीन में इन दिनों कोरोना वायरस का कहर चल रहा है। इससे वहां अब तक 2000 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। चीन इस वायरस की रोकथाम के लिए तमाम उपाय कर रहा है। लेकिन भारत में भी इसको लेकर अलर्ट जारी किया गया है। चीन से आने वाले यात्रियों का मेडिकल टेस्ट किया जा रहा है। वहां से आने वाले सामान पर भी विशेष नजर रखी जा रही है। अब इसका असर देश की फल मार्केट पर भी पड़ने लगा है।
ड्रैगन फ्रूट
दरअसल, चीन से मंगाए जाने वाले खास फल ड्रैगन को मंगाना व्यापारियों ने बंद कर दिया है। उनका कहना है कि वे थाईलैंड, मैक्सिको, वियतनाम और मध्य एशिया के देशों से ड्रैगन फ्रूट मंगा रहे हैं। हालांकि यहां से आने वाले फल चीन के फ्रूट से 20 से 25 प्रतिशत महंगा है। लेकिन कोरोना वायरस के चलते एहतियात बरती जा रही है। इसलिए अभी चीन से ड्रैगन फ्रूट नहीं मंगवाया जाएगा।
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ड्रैगन फ्रूट
- फोटो : फाइल फोटो
600-700 रुपये किलो बिक रहा है ड्रैगन
चीन से मंगाया जाने वाला ड्रैगन फ्रूट 400 रुपये किलो तक बिक रहा था। अब थाईलैंड, मैक्सिको, वियतनाम और मध्य एशिया से आने वाले ड्रैगन फ्रूट 600 से 700 रुपये किलो तक बिक रहा है। थोक में 10 किलो की फ्रूट की पेटी 1100 से 1200 रुपये तक सेक्टर-26 चंडीगढ़ की मार्केट में उपलब्ध है।
क्या है ड्रैगन फ्रूट
इसका वैज्ञानिक नाम 'हिलोसेरेस अंडटस' है। यह एक किस्म का बेल पर लगने वाला फल है, जो कैक्टिेसिया फैमिली से संबंधित है।
चीन से मंगाया जाने वाला ड्रैगन फ्रूट 400 रुपये किलो तक बिक रहा था। अब थाईलैंड, मैक्सिको, वियतनाम और मध्य एशिया से आने वाले ड्रैगन फ्रूट 600 से 700 रुपये किलो तक बिक रहा है। थोक में 10 किलो की फ्रूट की पेटी 1100 से 1200 रुपये तक सेक्टर-26 चंडीगढ़ की मार्केट में उपलब्ध है।
क्या है ड्रैगन फ्रूट
इसका वैज्ञानिक नाम 'हिलोसेरेस अंडटस' है। यह एक किस्म का बेल पर लगने वाला फल है, जो कैक्टिेसिया फैमिली से संबंधित है।
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ड्रैगन फ्रूट
- फोटो : फाइल फोटो
छत्तीसगढ़ में होती है खेती
छत्तीसगढ़ के पखांजूर क्षेत्र में इन दिनों इस खास फल की खेती की जा रही है। वहां पर यह फल थाईलैंड से मंगाए बीजों से उगाए जा रहे हैं। इस फल की डिमांड ज्यादा होने के कारण अभी भारत में इसका प्रचार प्रसार कम है।
इसलिए कहते हैं इसे ‘सुपर’ फ्रूट
स्वास्थ्य का भंडार होने के कारण इसे ‘सुपर’ फ्रूट का नाम दिया गया है। इसे खाने से कई फायदे होते हैं। इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट, फाइबर्स और विटामिन-सी पाया जाता है। यह कई गंभीर बीमारियों से रिकवरी करने में मदद करता है। सप्लीमेंट लेने के बजाय इस फल को खाना बेहतर विकल्प साबित होगा।
छत्तीसगढ़ के पखांजूर क्षेत्र में इन दिनों इस खास फल की खेती की जा रही है। वहां पर यह फल थाईलैंड से मंगाए बीजों से उगाए जा रहे हैं। इस फल की डिमांड ज्यादा होने के कारण अभी भारत में इसका प्रचार प्रसार कम है।
इसलिए कहते हैं इसे ‘सुपर’ फ्रूट
स्वास्थ्य का भंडार होने के कारण इसे ‘सुपर’ फ्रूट का नाम दिया गया है। इसे खाने से कई फायदे होते हैं। इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट, फाइबर्स और विटामिन-सी पाया जाता है। यह कई गंभीर बीमारियों से रिकवरी करने में मदद करता है। सप्लीमेंट लेने के बजाय इस फल को खाना बेहतर विकल्प साबित होगा।