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पति-पत्नी के संबंधों पर हाईकोर्ट ने सुनाया बेहद ऐतिहासिक फैसला, कई को झटका कई को राहत

Mon, 06 Aug 2018 12:20 PM IST
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 06 Aug 2018 12:20 PM IST
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Highcourt Decision on Husband Wife Relation, Divorce and Alimony
couple - फोटो : demo pic
पति और पत्नी के संबंधों को लेकर हाईकोर्ट ने बेहद ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जो कइयों को जहां झटका देगा, वहीं कइयों को राहत भी देखा। यहां पढ़ें फैसला...
Highcourt Decision on Husband Wife Relation, Divorce and Alimony
couple
पत्नी को गुजारा भत्ता देने पर स्थिति स्पष्ट करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम आदेश जारी कर कहा है कि यदि पति भिखारी हो तो भी उसे पत्नी को उसकी हैसियत के अनुसार गुजारा भत्ता देना होगा। हाईकोर्ट का यह आदेश छात्र होने और परिजनों पर आश्रित होने की दलील देते हुए पत्नी को गुजारा भत्ता देने में सक्षम नहीं होने की पति की दलील को खारिज करते हुए आया है।
Highcourt Decision on Husband Wife Relation, Divorce and Alimony
couple
गुरुग्राम निवासी पति ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए स्थानीय अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें कोर्ट ने उसे पत्नी को 18 हजार रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने को कहा था। याची ने कहा था कि 12 मार्च 2013 को उसकी शादी हुई थी। लेकिन पत्नी का व्यवहार काफी उग्र था और एक दिन वह खुद घर छोड़कर चली गई।
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Highcourt Decision on Husband Wife Relation, Divorce and Alimony
फाइल फोटो
हाईकोर्ट ने पति की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि याची बीटेक कोर्स करने की बात कहते हुए खुद को परिजनों पर आश्रित बता रहा है। वह फीस के तौर पर 60 हजार प्रति वर्ष भुगतान कर रहा है। ऐसे में यह स्पष्ट होता है कि वह मोटी फीस देने में सक्षम है। साथ ही शादी के समय ससुराल पक्ष ने उसे कार, गहने व अन्य सामान दिए थे। शादी पर लगभग 60 लाख खर्च हुआ था। कोई भी समृद्ध परिवार अपनी बेटी की शादी न कमाने वाले से नहीं करेगा। ऐसे में यह स्पष्ट होता है कि याची घर की आय में योगदान कर रहा था।
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Highcourt Decision on Husband Wife Relation, Divorce and Alimony
Couple
कोर्ट ने अपना फैसला लिखते हुए कहा कि शारीरिक रूप से सक्षम व्यक्ति बिना किसी आय साधन वाली पत्नी को गुजारा भत्ता देने के लिए बाध्य है। भले ही पति भीख मांगता हो तो भी वह अपनी कमाई के अनुरूप गुजारा भत्ता देने के लिए बाध्य है। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि पति ससुराल द्वारा दी गई आर्टिका कार को मेंटेन कर रहा है तो आखिर कैसे माना जा सकता है कि उसकी आय का कोई साधन नहीं है। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने गुुरुग्राम की अदालत द्वारा 5 सितंबर 2016 को जारी आदेश में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
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