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अनोखा मंदिर, जहां गणपति बप्पा के सामने लिखते हैं, मूषक के कान में बोलते हैं और पूरी हो जाती मुराद

Sat, 15 Sep 2018 09:31 AM IST
मोहित धुपड़, मुंबई
मोहित धुपड़, मुंबई Updated Sat, 15 Sep 2018 09:31 AM IST
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Ganesh Chaturthi 2018, Unique Tradition of Shree Siddhivinayak Temple Mumbai
Ganesh Chaturthi
गणेश चतुर्थी के मौके पर हम आपको बता रहे हैं देश में मौजूद एक ऐसे अनोखे मंदिर के बारे में, जहां गणपति बप्पा के सामने लिखने या मूषक के कान में बोलने से हर मुराद पूरी हो जाती है।
Ganesh Chaturthi 2018, Unique Tradition of Shree Siddhivinayak Temple Mumbai
सिद्धिविनायक मंदिर
यह मंदिर कोई और नहीं, बल्कि मुंबई के प्रभा देवी इलाके में स्थित श्री सिद्धिविनायक मंदिर हिंदू ही नहीं, बल्कि विभिन्न धर्मों के लोगों के लिए गहरी आस्था व पर्यटन का प्रतीक है। अपनी मुरादें लेकर देश व दुनिया से हजारों भक्त रोजाना इस मंदिर में बप्पा के समक्ष नतमस्तक होते हैं। मगर इस मंदिर में कुछ ऐसी गजब प्रथाएं भी हैं, जो भक्तों की बप्पा के प्रति अटूट अस्था को दर्शाती हैं।
Ganesh Chaturthi 2018, Unique Tradition of Shree Siddhivinayak Temple Mumbai
सिद्धिविनायक मंदिर
बिना स्याही बप्पा के सामने दीवार पर लिखते हैं मुराद
मंदिर में जहां श्री सिद्धिविनायक विराजमान है, उसके ठीक सामने एक दीवार पर संगमरमर का पट लगा हुआ है। बप्पा के दर्शनों के बाद जैसे ही भक्त दूसरे द्वार से बाहर आते हैं, तो वे बप्पा के सामने इस दीवार पर बिना स्याही अपनी अंगुली से अपने मन की मुराद लिख देते हैं। भक्तों का मानना है कि यहां जो मन की मुराद लिखी जाती है, वे भले ही किसी को नहीं दिखती, लेकिन सामने बैठे बप्पा न केवल उसे पढ़ लेते हैं, बल्कि उसे पूरी भी कर देते हैं। मुराद पूरी होने पर भक्त फिर से मंदिर आकर बप्पा का धन्यावाद  भी करते हैं।

 
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Ganesh Chaturthi 2018, Unique Tradition of Shree Siddhivinayak Temple Mumbai
सिद्धिविनायक मंदिर
मूषकों के कान में भी बोलते हैं मुराद
इसी तरह मंदिर परिसर में ही श्री सिद्धिविनायक मूर्ति भवन के बगल में ही चांदी के चार बड़े-बड़े मूषक (चूहा) विराजमान है। एक और गजब प्रथा के चलते भक्तजन मूषक के एक कान को अपने हाथ से बंद करते हैं और फिर दूसरे कान में अपनी मुराद बोलकर उसे बप्पा तक पहुंचाने की प्रार्थना की जाती है। भक्तों का मानना है कि मूषकों के कान में कही मुराद बप्पा तक पहुंचती है और बप्पा उनकी मुराद पूरी करते हैं।
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सिद्धिविनायक मंदिर
गर्भग्रह में चित्रित हैं दशावतार विष्णु की भी आकृतियां
मंदिर का गर्भग्रह इस तरह बनाया गया है कि अधिक से अधिक भक्त बप्पा के सभामंडप से सीधे दर्शन कर सके। गर्भग्रह के तीन दरवाजे हैं, जहां अष्ट विनायक, अष्टलक्ष्मी व दशावतार भगवान विष्णु की अकृतियां चित्रित हैं। किवदंती के अनुसार श्री सिद्धिविनायक मंदिर की स्थापना संवत 1692  में हुई थी। मगर सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक  इस मंदिर का निर्माण  19 नवंबर 1801 को किया गया था। हर साल यहां गणेश उत्सव खासे उत्साह से मनता है। पांच मंजिला इस मंदिर में प्रवचन गृह, गणेश संग्रहालय, गणेश विपीठ, निशुल्क अस्पताल व रसोईघर मौजूद है।
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