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मिसालः 15 साल से लंगर लगा करोड़ों का मालिक 'कंगाल'

Mon, 22 Jun 2015 02:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 22 Jun 2015 02:59 PM IST
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मिसालः 15 साल से लंगर लगा करोड़ों का मालिक 'कंगाल'

father days special, 1000 hungers father jagdish lal ahuja

तस्वीरों में आप जिस इंसान को देख रहे हैं, ये किसी समय करोड़पति थे। 15 साल से लंगर लगा-लगाकर आज यह कंगाली के दौर से गुजर रहा है, लेकिन जज्बा बरकरार है।


मिसालः 15 साल से लंगर लगा करोड़ों का मालिक 'कंगाल'

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इस इंसान का नाम है जगदीश लाल आहुजा। इन्हें लोग बाबा और इनकी पत्नी को जय माता दी के नाम से जानते हैं। 80 साल का ये बुजुर्ग पत्नी के साथ मिलकर रोज एक हजार लोगों का पेट भरता है। 15 साल से ये इंसान पीजीआई के बाहर दाल, रोटी, चावल और हलवा बांट रहा है, वो भी बिना किसी छुट्टी के। जो लोग उन्हें जानते हैं, वह कहते हैं कि आहुजा ने एक से डेढ़ हजार लोगों को गोद ले रखा है।

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जगदीश लाला आहुजा भूखों का पेट भरने के लिए एक-एक कर करोड़ों की आधा दर्जन प्रॉपर्टी बेच चुके हैं। कई मुश्किलें आईं। लेकिन आहुजा के सेवा भाव में कमी नहीं आई। लंगर के लिए आज तक उन्होंने किसी से पैसे नहीं मांगे। कभी वे पीजीआई के अलावा 9 जगहों पर जरूरी सामान बांटते थे, लेकिन रुपयों की कमी के कारण उन जगहों पर जाना बंद हो गया।

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आहुजा कहते हैं कि उन्हें जब कोई भूखा नजर आता है तो लगता है कि यह मेरे बच्चे जैसा है और मैं अपने बच्चे को कैसे भूखा रख सकता हूं। पैसों की कमी के चलते आहुजा अब सिर्फ पीजीआई और जीएमसीएच-32 के बाहर लंगर लगाते हैं और कहते हैं कि जब तक जमा पूंजी है, तब तक लंगर चलता रहेगा। दो साल पहले तक वे सारा कामकाज खुद देखते थे, लेकिन अब तबियत खराब रहने से वह सिर्फ दो घंटे के लिए पीजीआई जाते हैं। साथ में उनकी पत्नी भी होती हैं।

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जगदीश लाल आहुजा बताते हैं कि अब उनके लिए लंगर चलाना मुश्किल हो गया है। उनके पास रुपये भी नहीं हैं और न ही उसे संभालने का दमखम। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति या सोसाइटी उनके लंगर को संभालना चाहता है तो वे इस लंगर को उसे सौंप सकते हैं। अगर कोई आगे नहीं आया तो वे जब तक जिंदा हैं, तब तक पीजीआई के बाहर लंगर चलते रहेंगे।

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