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Chandigarh News: पीयू में छात्र सियासत का फाइनल मुकाबला, चार अध्यक्ष दावेदारों के बीच टक्कर
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस स्टूडेंट्स काउंसिल चुनाव (पीयूसीएससी) की तस्वीर अब पूरी तरह साफ हो गई है। 31 अगस्त को होने वाले चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए चार और उपाध्यक्ष पद के लिए पांच उम्मीदवार मैदान में हैं। अंतिम सूची जारी होते ही कैंपस में छात्र राजनीति का माहौल गरमा गया है। इस बार मुकाबला केवल चार प्रमुख पदों पर जीत-हार तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि अलग-अलग छात्र संगठनों के प्रभाव, संगठनात्मक क्षमता, गठजोड़ और छात्र वोट बैंक की भी परीक्षा होगी।
अध्यक्ष पद पर चार चेहरे, चार राजनीतिक धाराएं आमने-सामने
अध्यक्ष पद पर एसैप के आदिल बराड़, एबीवीपी के अंकित बिढान, सत्थ के दर्शप्रीत सिंह और एनएसयूआई के गुरमन सिंह सिद्धू आमने-सामने हैं। चारों उम्मीदवार अलग-अलग छात्र संगठनों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। ऐसे में अध्यक्ष पद की लड़ाई को कैंपस की मौजूदा छात्र राजनीति का अहम मुकाबला माना जा रहा है। किसी उम्मीदवार की जीत उसके व्यक्तिगत राजनीतिक कद के साथ संबंधित संगठन की कैंपस में पकड़ को भी मजबूत करेगी। वहीं हारने वाले संगठनों के लिए यह अपनी रणनीति और छात्र संपर्क की समीक्षा का संकेत होगी।
उपाध्यक्ष पद पर पांच दावेदार, वोट बंटवारे से बदलेगा गणित
उपाध्यक्ष पद पर मुकाबला और पेचीदा हो गया है। यहां एनएसयूआई की आकांक्षा ठाकुर, आईसा के अरमान सिंह, पीयूडीएफ के अरमान सिंह भिंडर, साखी की मनमीत कौर और आईएसओ के विपुल भादू मैदान में हैं। पांच उम्मीदवार होने से वोटों के बंटवारे की संभावना बढ़ गई है। ऐसे में कम अंतर से भी जीत-हार का फैसला हो सकता है। हॉस्टल, विभागों और अलग-अलग छात्र समूहों में उम्मीदवारों की पकड़ नतीजों को प्रभावित कर सकती है। समान मुद्दों या छात्र वर्गों के बीच समर्थन का बंटवारा भी अंतिम परिणाम का गणित बदल सकता है।
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सचिव पद पर त्रिकोणीय मुकाबला
सचिव पद पर इनसो के आर्यन सहारन, आजाद उम्मीदवार ध्यान सिंह और एचपीएसयू की मुस्कान चौहान के बीच मुकाबला है। तीनों उम्मीदवारों के लिए संगठनात्मक समर्थन के साथ व्यक्तिगत पहचान भी अहम भूमिका निभा सकती है।
संयुक्त सचिव पद पर चार उम्मीदवार
संयुक्त सचिव पद पर आईसा की आमीन कौर, एचएसए के देवराज सिंह नैन, यूएसए के राम चंदर सिंह और आजाद उम्मीदवार विशाल बमल मैदान में हैं। चार उम्मीदवार होने के कारण यहां भी वोटों के विभाजन की संभावना है। अंतिम दिनों का प्रचार और व्यक्तिगत संपर्क इस मुकाबले में निर्णायक हो सकता है।
संगठनों की प्रतिष्ठा भी दांव पर
इस बार अध्यक्ष पद का चुनाव छात्र संगठनों की प्रतिष्ठा से भी जुड़ा है। बड़े संगठनों के लिए यह कैंपस में अपनी स्वीकार्यता और छात्र मुद्दों पर पकड़ साबित करने का मौका है। नतीजे यह भी संकेत देंगे कि छात्रों के बीच किस संगठन की विचारधारा और स्थानीय मुद्दों की पकड़ मजबूत है।
हॉस्टल से विभागों तक पहुंचेगा चुनावी अभियान
अंतिम सूची जारी होने के बाद उम्मीदवारों के सामने कम समय में अधिक से अधिक छात्रों तक पहुंचने की चुनौती है। हॉस्टल संपर्क, विभागों में संवाद, छात्र समूहों के साथ बैठकें और व्यक्तिगत संपर्क अभियान तेज होने की संभावना है। खासकर बहुकोणीय मुकाबले वाले पदों पर एक-एक वोट महत्वपूर्ण होगा।
31 अगस्त को खुलेगा चुनावी पिटारा
अब असली चुनावी मुकाबला शुरू हो गया है। उम्मीदवार अपनी रणनीति को जमीन पर उतारने में जुटेंगे। 31 अगस्त का मतदान तय करेगा कि पीयू कैंपस की छात्र राजनीति में किस संगठन और उम्मीदवार की पकड़ सबसे मजबूत है। अध्यक्ष पद पर चार और उपाध्यक्ष पद पर पांच उम्मीदवारों के मैदान में होने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। अब फैसला छात्रों के हाथ में है कि कैंपस का ताज किसके सिर सजेगा।
बॉक्स-अध्यक्ष पद के चार उम्मीदवार
आदिल बराड़ — एसैप
अंकित बिढान — एबीवीपी
दर्शप्रीत सिंह — सत्थ
गुरमन सिंह सिद्धू — एनएसयूआई
सचिव पद पर ये उम्मीदवार
आर्यन सहारन — इनसो
ध्यान सिंह — आजाद
मुस्कान चौहान — एचपीएसयू
संयुक्त सचिव पद पर ये उम्मीदवार
आमीन कौर — आईसा
देवराज सिंह नैन — एचएसए
राम चंदर सिंह — यूएसए
विशाल बमल — आजाद
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अध्यक्ष पद पर चार चेहरे, चार राजनीतिक धाराएं आमने-सामने
अध्यक्ष पद पर एसैप के आदिल बराड़, एबीवीपी के अंकित बिढान, सत्थ के दर्शप्रीत सिंह और एनएसयूआई के गुरमन सिंह सिद्धू आमने-सामने हैं। चारों उम्मीदवार अलग-अलग छात्र संगठनों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। ऐसे में अध्यक्ष पद की लड़ाई को कैंपस की मौजूदा छात्र राजनीति का अहम मुकाबला माना जा रहा है। किसी उम्मीदवार की जीत उसके व्यक्तिगत राजनीतिक कद के साथ संबंधित संगठन की कैंपस में पकड़ को भी मजबूत करेगी। वहीं हारने वाले संगठनों के लिए यह अपनी रणनीति और छात्र संपर्क की समीक्षा का संकेत होगी।
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उपाध्यक्ष पद पर पांच दावेदार, वोट बंटवारे से बदलेगा गणित
उपाध्यक्ष पद पर मुकाबला और पेचीदा हो गया है। यहां एनएसयूआई की आकांक्षा ठाकुर, आईसा के अरमान सिंह, पीयूडीएफ के अरमान सिंह भिंडर, साखी की मनमीत कौर और आईएसओ के विपुल भादू मैदान में हैं। पांच उम्मीदवार होने से वोटों के बंटवारे की संभावना बढ़ गई है। ऐसे में कम अंतर से भी जीत-हार का फैसला हो सकता है। हॉस्टल, विभागों और अलग-अलग छात्र समूहों में उम्मीदवारों की पकड़ नतीजों को प्रभावित कर सकती है। समान मुद्दों या छात्र वर्गों के बीच समर्थन का बंटवारा भी अंतिम परिणाम का गणित बदल सकता है।
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सचिव पद पर त्रिकोणीय मुकाबला
सचिव पद पर इनसो के आर्यन सहारन, आजाद उम्मीदवार ध्यान सिंह और एचपीएसयू की मुस्कान चौहान के बीच मुकाबला है। तीनों उम्मीदवारों के लिए संगठनात्मक समर्थन के साथ व्यक्तिगत पहचान भी अहम भूमिका निभा सकती है।
संयुक्त सचिव पद पर चार उम्मीदवार
संयुक्त सचिव पद पर आईसा की आमीन कौर, एचएसए के देवराज सिंह नैन, यूएसए के राम चंदर सिंह और आजाद उम्मीदवार विशाल बमल मैदान में हैं। चार उम्मीदवार होने के कारण यहां भी वोटों के विभाजन की संभावना है। अंतिम दिनों का प्रचार और व्यक्तिगत संपर्क इस मुकाबले में निर्णायक हो सकता है।
संगठनों की प्रतिष्ठा भी दांव पर
इस बार अध्यक्ष पद का चुनाव छात्र संगठनों की प्रतिष्ठा से भी जुड़ा है। बड़े संगठनों के लिए यह कैंपस में अपनी स्वीकार्यता और छात्र मुद्दों पर पकड़ साबित करने का मौका है। नतीजे यह भी संकेत देंगे कि छात्रों के बीच किस संगठन की विचारधारा और स्थानीय मुद्दों की पकड़ मजबूत है।
हॉस्टल से विभागों तक पहुंचेगा चुनावी अभियान
अंतिम सूची जारी होने के बाद उम्मीदवारों के सामने कम समय में अधिक से अधिक छात्रों तक पहुंचने की चुनौती है। हॉस्टल संपर्क, विभागों में संवाद, छात्र समूहों के साथ बैठकें और व्यक्तिगत संपर्क अभियान तेज होने की संभावना है। खासकर बहुकोणीय मुकाबले वाले पदों पर एक-एक वोट महत्वपूर्ण होगा।
31 अगस्त को खुलेगा चुनावी पिटारा
अब असली चुनावी मुकाबला शुरू हो गया है। उम्मीदवार अपनी रणनीति को जमीन पर उतारने में जुटेंगे। 31 अगस्त का मतदान तय करेगा कि पीयू कैंपस की छात्र राजनीति में किस संगठन और उम्मीदवार की पकड़ सबसे मजबूत है। अध्यक्ष पद पर चार और उपाध्यक्ष पद पर पांच उम्मीदवारों के मैदान में होने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। अब फैसला छात्रों के हाथ में है कि कैंपस का ताज किसके सिर सजेगा।
बॉक्स-अध्यक्ष पद के चार उम्मीदवार
आदिल बराड़ — एसैप
अंकित बिढान — एबीवीपी
दर्शप्रीत सिंह — सत्थ
गुरमन सिंह सिद्धू — एनएसयूआई
सचिव पद पर ये उम्मीदवार
आर्यन सहारन — इनसो
ध्यान सिंह — आजाद
मुस्कान चौहान — एचपीएसयू
संयुक्त सचिव पद पर ये उम्मीदवार
आमीन कौर — आईसा
देवराज सिंह नैन — एचएसए
राम चंदर सिंह — यूएसए
विशाल बमल — आजाद