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Chandigarh News: दिल्ली मॉडल अपनाकर 62 हजार हाउसिंग बोर्ड मकानों में बदलावों को नियमित करने की मांग

Wed, 26 Aug 2026 12:33 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 26 Aug 2026 12:33 AM IST
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Demand to regularize alterations in 62,000 Housing Board houses by adopting the Delhi model.

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चंडीगढ़। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के करीब 62 हजार एमआईजी और एलआईजी मकानों में पिछले चार दशक के दौरान किए गए बदलावों को लेकर रेजिडेंट्स ने अब स्थायी समाधान की मांग उठाई है। मंगलवार को हाउसिंग बोर्ड में सीईओ डी. कार्तिकेयन की अध्यक्षता में हुई जनसुनवाई में एमआईजी और एलआईजी रेजिडेंट्स ने पुराने मॉडिफिकेशन, इंसीडेंटल स्पेस, बैक कोर्टयार्ड, गैलरी और अन्य बदलावों के लिए एकमुश्त रेगुलराइजेशन या कंपाउंडिंग स्कीम लागू करने की मांग की। इसके लिए दिल्ली में डीडीए की आवासीय संपत्तियों में अपनाई गई व्यवस्था का भी हवाला दिया गया।
रेजिडेंट्स के अनुसार अधिकांश मकान 40 से 45 वर्ष पुराने हैं। समय के साथ परिवारों की जरूरतें बदली हैं और सुरक्षा, रखरखाव व सीमित जगह के बेहतर इस्तेमाल के लिए कई मकानों में बदलाव किए गए हैं। उनका कहना है कि पुराने बदलावों को केवल उल्लंघन मानकर कार्रवाई करने के बजाय एक बार नीति बनाकर समाधान किया जाना चाहिए।
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कंपाउंडेबल बदलावों के लिए शुल्क लेकर नियमितीकरण का प्रस्ताव
रेजिडेंट्स ने करीब 62 हजार मकानों को एक व्यापक नीति के दायरे में लाने का सुझाव दिया। पहले मूल स्वीकृत नक्शों का सत्यापन, फिर मौजूदा बदलावों की पहचान कर उन्हें कंपाउंडेबल और नॉन-कंपाउंडेबल श्रेणियों में बांटने की मांग की गई। कंपाउंडेबल बदलावों पर निर्धारित शुल्क लेकर उन्हें नियमित करने का प्रस्ताव है।
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बैक कोर्टयार्ड में 150 वर्गफीट से अधिक कवरेज पर राहत
रेजिडेंट्स ने बैक कोर्टयार्ड में अतिरिक्त कवरेज को भी एकमुश्त कंपाउंडिंग शुल्क लेकर नियमित करने की मांग की। उनका कहना है कि कई मकानों में कोर्टयार्ड का क्षेत्र करीब 200 से 220 वर्गफीट है, जबकि करीब 150 वर्गफीट तक कवरेज की अनुमति है। परिवार की जरूरतों के कारण कुछ लोगों ने इससे अधिक क्षेत्र को कवर किया है।
पेविंग, गैलरी और दीवारों में बदलाव भी नीति में शामिल हों
मकानों के बाहर टाइल-पेविंग और ब्यूटीफिकेशन को भी अतिक्रमण नहीं मानने की मांग की गई। रेजिडेंट्स का कहना है कि जहां इससे सार्वजनिक रास्ते, जल निकासी, वेंटिलेशन या जरूरी सेवाएं प्रभावित नहीं होतीं, वहां राहत दी जानी चाहिए।

इंसीडेंटल स्पेस का ब्यूटीफिकेशन, अतिरिक्त बैक कोर्टयार्ड कवरेज, बाहरी पेविंग, 9 इंच की भारवहन दीवारों में बदलाव और विस्तारित गैलरी को भी एक समान नीति के तहत जांचने का सुझाव दिया गया। भारवहन दीवारों में बदलाव वाले मामलों में योग्य संरचनात्मक अभियंता से स्थिरता प्रमाणपत्र लेने के बाद कंपाउंडिंग या नियमितीकरण पर विचार करने की मांग की गई है।
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