होनहार बेटे ने ऐसा इतिहास रच दिया कि मां-बाप का सिर फक्र से ऊंचा हो गया। उनकी आंखों में आंसू छलक पड़े, जानिए कौन है वो शख्स।
हम बात कर रहे हैं हरियाणा में जींद जिले के गांव शादीपुर निवासी दीपक लाठर की। दीपक ने गोल्ड कोस्ट में चल रहे 21वें कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टिंग में 69 किग्रा कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल जीता है। दीपक ने स्नैच के पहले ही प्रयास में 132 किग्रा का वजन उठाया। दूसरे प्रयास में उन्होंने 136 किग्रा उठाया। कुल मिलाकर दीपक ने कुल 295 किलोग्राम वजन उठाकर देश को दूसरे दिन एक और मेडल दिलाने में कामयाब रहे।
बता दें कि शुक्रवार को हुए इस मुकाबले में कुल 299 किग्रा के साथ वेल्स के वेटलिफ्टर को गोल्ड मिला। वहीं, 297 किग्रा के साथ श्रीलंका के वेटलिफ्टर ने सिल्वर मेडल जीता। बता दें कि खेल के पहले भारत के स्टार बॉक्सर मनोज कुमार ने 69 किग्रा भार वर्ग में अपना पहला मुकाबला जीता। मनोज कुमार ने साल 2010 में दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीता था।
दूसरी ओर, दीपक के मेडल जीतने के बाद परिवार में खुशी का माहौल है। मां-बाप खुशी से फूले नहीं समा रहे। नाच गाकर जश्न मनाया जा रहा है, मिठाईयां बांटी जा रही हैं। दीपक की मां कहती हैं कि बेटे ने उनका मान बढ़ाया है। देश का मान बढ़ाया है, उन्हें बेटे पर गर्व है। वहीं पिता का कहना है कि दीपक ने उनका सीना गर्व से चौड़ा कर दिया, ऐसा बेटा भगवान हर किसी को दे।
दीपक के पिता बिजेंद्र लाठर बताते हैं कि उसने 8 साल पहले विदेशी कोच सलाह से वेटलिफ्टिंग शुरू की थी। वैसे भी दीपक वजन उठाने में मजबूत है। बचपन में वह अकेला खेत में चारे की 50 किलो की गठड़ी उठा लेता था। 2009 में उसने गांव के स्कूल से ही पांचवीं कक्षा पास की और उसके बाद आर्मी स्पोर्टस इंस्टीट़्यूट पूना में दीपक का सेलेक्शन हो गया। वहां विदेशी कोच जार्ज गुबला ने दीपक को वेटलिफ्टिंग करने की सलाह दी।