देखिए, ये 9 'नेता' चलाते थे रामपाल का 'रावणराज'
सतलोक आश्रम में तथाकथित संत रामपाल का पूरा साम्राज्य नौ रत्नों के सहारे चलता था। इन नौ रत्नों ने ही रामपाल और प्रशासन के बीच चले संघर्ष में अहम भूमिका निभाई थी। अब पुलिस इन सभी की कुंडली खंगाल रही है।
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पुलिस की अभी तक की जांच में सामने आया है कि रामपाल के बाद बलजीत आश्रम में सर्वेसर्वा था। वह पढ़ा-लिखा था और उसे प्रबंधन का ज्ञान था। उसकी बेटी बबीता भी रामपाल की खास साधक थी, जो फिलहाल हिसार सेंट्रल जेल में है। पुलिस ने उसे भी आश्रम से ही गिरफ्तार किया था।
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रामकंवर उर्फ रामकुमार ढाका निवासी सुडाना जिला झज्जर का रहने वाला है। वह रिटायर्ड टीचर है। रामकंवर आरएसएस का मुखी और रामपाल का विशेष सलाहकार था। उसके साथ सिद्धार्थ भी था, जो कमांडो को पूर्व सैनिकों और पुलिस कर्मचारियों के सहयोग से ट्रेनिंग देने की जिम्मेदारी उठाता था।
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कुरुक्षेत्र निवासी पुरुषोत्तम सैनी भी रामपाल के ट्रस्ट का खास मेंबर था। वह आश्रम की राशि को रीयल एस्टेट के कारोबार में लगाता और उससे होने वाली आय का ब्योरा रखता था। इसके अलावा आश्रम में आने वाले दान का हिसाब-किताब उसके पास था।
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रामअवतार मूल रूप से धीरणवास गांव का रहने वाला है और प्रदेश सरकार में एक नौकरशाह का रिश्तेदार है। यह रामपाल का लीगल एक्सपर्ट था। सतलोक आश्रम की कमेटी का यह एक्टिव मेंबर भी था। इसकी पत्नी भी एक प्रोफेसर है, जिसने रामपाल के आश्रम के सामने महिलाओं की भीड़ एकत्रित करने में अहम भूमिका निभाई थी।