रामकिशन ग्रेवाल को शहीद का दर्जा देने पर सियासत चरम पर है लेकिन हकीकत तो ये है कि शहीद का दर्जा तो दूर उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान से भी नहीं किया गया। देखिए
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सुसाइड के बाद 'शहीद के दर्जे' पर सियासत
दिल्ली के बाद वीरवार को गांव बामला देशभर के मीडिया और राजनीति का केंद्र बना रहा। सियासत और गम के माहौल के बीच पूर्व सैनिक सूबेदार रामकिशन ग्रेवाल का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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सुसाइड के बाद 'शहीद के दर्जे' पर सियासत
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, कांग्रेस के हरियाणा प्रभारी कमलनाथ सहित प्रदेश के भाजपा और कांग्रेस नेता परिजनों को सांत्वना देने पहुंचे और शव यात्रा में भी शामिल हुए।
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सुसाइड के बाद 'शहीद के दर्जे' पर सियासत
अंत्येष्टि के बाद रामकिशन को शहीद का दर्जा देने पर सियासत छिड़ गई। केजरीवाल ने रामकिशन को शहीद का दर्जा देते हुए दिल्ली सरकार की मुआवजा नीति के तहत परिजनों को एक करोड़ रुपये और एक सदस्य को नौकरी देने का एलान किया।
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सुसाइड के बाद 'शहीद के दर्जे' पर सियासत
रामकिशन के बेटे ने कहा है कि उनके पिता को शहीद का दर्जा और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की बात कही गई थी। मगर, केंद्र सरकार ने कुछ नहीं किया। हालात ये रहे कि हम अपने पिता का ठीक से अंतिम संस्कार भी नहीं कर पाए।