बाबा रामदेव को यह खबर झटका दे सकती है। देश के एक बड़े संस्थान ने उनके 'ड्रीम प्रोजेक्ट' का कड़ा विरोध किया है, जानिए क्या है पूरा माजरा?
दरअसल, 1940 के दशक में भारत से भेजे गए बैलों के सीमन से देशी गायों की नस्ल सुधारने को लेकर की गई बाबा रामदेव की पहल का विरोध शुरू हो गया है। देश की सर्वश्रेष्ठ गोशाला घोषित की गई ‘कामधेनु’ (दिव्य ज्योति जागृति संस्थान, नूरमहल) ने ब्राजील से आयातित सीमन को गिर नस्ल की गायों के लिए ‘खतरनाक’ बताया है।
संस्थान ने इसके आयात पर तत्काल पाबंदी लगाने की मांग की है। बाबा रामदेव ने पिछले साल सलाह दी थी कि कृत्रिम गर्भाधान के जरिये देश में दुधारू गायों की संख्या बढ़ाने की कोशिश की जानी चाहिए। इस योजना के अंतर्गत गायों की नस्ल सुधारने में अमेरिका और नीदरलैंड के विशेषज्ञों की मदद ली जानी थी और ब्राजील के बैलों के सीमन का इस्तेमाल किया जाना था।
तर्क दिया गया था कि दुधारू गायों की संख्या बढ़ने से गोकशी पर भी लगाम लगेगी। पहलकदमी के तहत कई प्रदेशों के सरकारी शिष्टमंडल ब्राजील का दौरा कर चुके हैं। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के गोशाला प्रबंधक स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि ब्राजीली 1940 के दशक में भारत से बैलों को लेकर गए थे।
उन्होंने वहां इन बैलों से सुरगिरलैंडो व इंडो ब्राजिलीयन नस्ल तैयार की। इसलिए भारतीय बैलों की अशुद्ध ब्रीड से देशी गायों की नस्ल सुधारने की योजना ठीक नहीं है। इससे गिर नस्ल मिक्स ब्रीड बन जाएगी। भारतीय गायों की नस्ल में शुद्धता है, हमें उनका ही इस्तेमाल करना चाहिए। संस्थान ने अपने विरोध के बारे में केंद्र सरकार को अवगत करा दिया है।